ईरान ने सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला किया, जिसमें अमेरिकी E-3 AWACS जासूसी विमान के निशाने पर आने की खबर है। जानिए इस 700 मिलियन डॉलर के विमान की खासियत।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के हमले के बाद जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने हालात की गंभीरता साफ कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में अमेरिका का बेहद अहम जासूसी विमान बोइंग E-3 सेंट्री (E-3 AWACS) भी चपेट में आ सकता है। अगर यह पुष्टि होती है तो यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।
क्या है E-3 AWACS और क्यों इतना खास?
E-3 AWACS कोई साधारण विमान नहीं है। यह दरअसल एक 'उड़ता हुआ रडार' और हवाई कमांड सेंटर होता है। इस विमान की मदद से दुश्मन के विमानों और मिसाइलों पर नजर रखी जाती है। पूरे हवाई ऑपरेशन को कंट्रोल किया जाता है। साथ ही युद्ध के दौरान रियल टाइम कमांड और कम्युनिकेशन मिलता है। इसकी कीमत करीब 700 मिलियन डॉलर बताई जाती है। ये प्लेन दुनिया के सबसे महंगे और रणनीतिक सैन्य विमानों में शामिल करती है।
ईरान का आरोप और बढ़ता तनाव
इस बीच मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक तरफ अमेरिका बातचीत की बात करता है। लेकिन दूसरी तरफ चुपके से जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है और अगर अमेरिकी सैनिक जमीन पर उतरते हैं।तो उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिकी सेना की बढ़ती गतिविधियां
उधर यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि उसका उभयचर हमला करने वाला जहाज यूएसएस ट्रिपोली (LHA-7) मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है। इस जहाज पर करीब 3,500 मरीन और नाविक तैनात हैं। साथ ही इसमें लड़ाकू विमान और अन्य सामरिक संसाधन भी शामिल हैं।
क्या बढ़ेगा युद्ध?
जिस तरह से एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष अब और गहराता जा रहा है। अगर अमेरिकी जासूसी विमान पर हमले की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर टकराव को और तेज कर सकता है। इतना ही नहीं हालात नियंत्रण से बाहर भी जा सकते हैं।