होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही घट गई है। तेल कीमतों में 40% उछाल, 2000 जहाज फंसे। जानिए युद्ध का वैश्विक असर।
यह एक बेहद दिलचस्प विरोधाभास है कि दुनिया भर में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला होर्मुज न तो पूरी तरह से खुला है और न ही औपचारिक रूप से बंद है। दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग बंद है। इसका असर यह हुआ कि तेल की कीमतों में 40 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। मूल रूप से दुनिया उस युद्ध की आर्थिक कीमत चुका रही है, जो तीन देशों के बीच लड़ा जा रहा है।
ऐसा नहीं है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका या इजराइल ने ईरान पर हमला किया, तो उन्हें युद्ध के नतीजों का अंदाजा नहीं था। ईरान होर्मुज के किनारे स्थित है और इस शिपिंग रूट को प्रभावी रूप से नियंत्रित करता है। होर्मुज की खाड़ी इतनी संकरी है कि जहाज ईरान द्वारा दावा किए गए जलक्षेत्र से बचकर गुजरने में असमर्थ होते हैं। ईरान इसका हमेशा से प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर इस्तेमाल करता है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, मार्च में अब तक केवल 138 जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजरे हैं, जिनमें 87 तेल और गैस टैंकर शामिल हैं। यानी प्रतिदिन सिर्फ 5 से 6 जहाज। जबकि युद्ध से पहले रोजाना लगभग 138-140 जहाज होर्मुज से गुजरते थे। मौजूदा समय में लगभग 2,000 जहाज होर्मुज के आसपास के समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
किन देशों को ईरान की मंजूरी मिली?
बहुत कम देशों को अपने टैंकर इस शिपिंग रूट से निकालने की अनुमति मिली है। प्रतिबंधित टैंकर और तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ अब अधिकांश आवाजाही का हिस्सा बन चुके हैं। 28 फरवरी के बाद से अधिकतर तेल एशिया, विशेष रूप से चीन की ओर गया है। चीन को ईरान का सहयोगी भी माना जाता है। इस अवधि में 1.2 करोड़ बैरल से अधिक तेल चीन पहुंच चुका है। कुछ टैंकरों ने सुरक्षित मार्ग पाने के लिए खुद को चीन से जुड़ा हुआ भी घोषित किया है।
लॉयड्स के एनालिसिस के अनुसार, लगभग एक-तिहाई जहाज ईरान से जुड़े या उसके स्वामित्व वाले थे। इसके बाद ग्रीस और चीन के जहाज हैं। भारत के लिए जा रहे छह टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जबकि लगभग 20 भारतीय झंडे वाले जहाज, जिनमें 540 भारतीय नाविक हैं, अभी भी पार होने का इंतजार कर रहे हैं। पाकिस्तान और तुर्की के जहाजों को भी ईरान ने अनुमति दी है।
तेल की कीमतों में 40 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी
ड्रोन-मिसाइल ही नहीं, ईरान ने होर्मुज को भी एक रणनीतिक हथियार बना लिया है। करीब दो हजार जहाज समुद्री क्षेत्र में फंसे हुए हैं।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सुरक्षित मार्ग के लिए प्रति जहाज 20 लाख डॉलर (करीब 18 करोड़ रुपये) तक वसूल रहा है, हालांकि ईरान ने इस दावे से इनकार किया है। वास्तव में, इस पूरे मार्ग को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है।
होर्मुज से लौटा पाकिस्तान जा रहा कंटेनर जहाज
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग के बीच पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ बनने की पेशकश की है और उनके इस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।इसी बीच खबर है कि पाकिस्तान जा रहे एक कंटेनर जहाज को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से लौटा दिया। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के एंट्री गेट पर कराची जा रहे इस जहाज को वापस कर दिया, क्योंकि उसने इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की पूर्व अनुमति नहीं ली थी। एआईएस ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ‘सेलेन’ नाम का जहाज 23 मार्च को शारजाह एंकरेज से रवाना हुआ था।