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यूके में भारतीय विरासत की संरक्षण परियोजना

यूके में स्वामी विवेकानंद से लेकर सावरकर तक का इतिहास सहेजेगी 'SMRITI', FISI ने मनाई स्वर्ण जयंती

लंदन में FISI ने अपनी 50वीं वर्षगांठ पर 'SMRITI' परियोजना शुरू की, जिसमें विवेकानंद से लेकर सावरकर तक के योगदान को दस्तावेजीकृत किया जाएगा।


यूके में स्वामी विवेकानंद से लेकर सावरकर तक का इतिहास सहेजेगी smriti fisi ने मनाई स्वर्ण जयंती

लंदन। ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों के हितों की रक्षा करने और भारत की आवाज को बुलंद करने वाले सबसे पुराने संगठन फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटरनेशनल यूके (FISI UK) ने अपने शानदार 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

FISI UK के राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक विनय पुजारी ने बताया कि इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती के अवसर पर संगठन ने 'SMRITI' (स्मृति) नामक एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की है, जिसके तहत ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों के योगदान और भारत की समृद्ध विरासत को दस्तावेजीकृत (Document) किया जाएगा।

चाहे वे स्वामी विवेकानंद हों या विनायक दामोदर सावरकर सभी महापुरुषों के योगदान और उनके इतिहास को सहेजने का काम यह संस्था करेगी.28 जून 2026 को वेस्ट केंसिंग्टन स्थित 'द भवन्स' में आयोजित एक भव्य समारोह में इस मील के पत्थर का जश्न मनाया गया, जिसमें ब्रिटिश संसद के सदस्यों, लॉर्ड्स और प्रवासी समुदाय के दिग्गज नेताओं ने शिरकत की।

SMRITI: ब्रिटेन में भारत के गौरवशाली इतिहास को सहेजने की मुहिम

शाम की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घोषणा 'SMRITI – द इंडियन लेगेसी इन द यूके' पहल की रही, जिसे सरिता राहुल ने मंच पर प्रस्तुत किया। यह परियोजना उन महान भारतीयों की कहानियों और योगदान को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करेगी जिन्होंने ब्रिटेन की धरती पर रहकर इतिहास को एक नया आकार दिया-चाहे वे स्वामी विवेकानंद हों या विनायक दामोदर सावरकर।

'SMRITI' परियोजना के तीन मुख्य स्तंभ:

विरासत पत्रिका (Heritage Magazine): भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक संबंधों और प्रवासियों की सफलता की कहानियों का संकलन।हेरिटेज टूर (Guided Heritage Tours): पूरे ब्रिटेन में उन स्थानों को चिह्नित कर गाइडेड टूर आयोजित करना, जो भारतीय इतिहास से जुड़े हैं।

ब्लू प्लाक अभियान (Blue Plaque Campaign): ऐतिहासिक भारतीय हस्तियों से जुड़े भवनों और स्थानों पर नीली पट्टिकाएं (Blue Plaques) लगाना।

50 वर्षों का सफर: आपातकाल से लेकर वैश्विक मंच तक

FISI UK की यात्रा 1976 में भारत में लगे आपातकाल के बाद शुरू हुई थी। उस समय ब्रिटिश-भारतीय कार्यकर्ताओं के एक छोटे लेकिन दृढ़ समूह ने इसकी नींव रखी थी। उनका मानना था कि प्रवासी समुदाय के पास विश्व मंच पर भारत के लिए बोलने का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं।

कैसे हुई शुरूआत

जब वेस्टमिंस्टर (ब्रिटिश संसद) में भारत की राजनीतिक आवाज न के बराबर थी, तब FISI UK ने ब्रिटिश सरकार और मीडिया के साथ संवाद के सेतु बनाए। भ्रामक सूचनाओं पर किया प्रहार: पांच दशकों में संगठन ने भारत के खिलाफ फैलाए जाने वाले गलत आख्यानों (Narratives) का डटकर मुकाबला किया।

मानवाधिकारों की रक्षा के लिए किया काम

1970-80 के शुरुआती अभियानों से लेकर हाल ही में पाकिस्तान से भागकर आए हिंदू अल्पसंख्यकों के मानव अधिकारों के लिए ब्रिटिश संसद में कार्यक्रम आयोजित करने तक, FISI UK हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहा है और इसके लिए काम किया है.

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुहाने पर ऐतिहासिक मिलन

यह स्वर्ण जयंती एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर आई है, जब 15 जुलाई 2026 को भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (FTA) लागू होने जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में सालाना £25 अरब (25 बिलियन पाउंड) से अधिक की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

प्रवासी अब केवल सेतु नहीं, विकास का इंजन हैं

FISI UK के अध्यक्ष मधुरेश मिश्रा ने कहा कि पचास वर्षों तक FISI UK ब्रिटेन में भारत की शांत लेकिन दृढ़ आवाज़ रहा है—संसद में, मीडिया में और समुदाय में. आज की शाम केवल हमारे अतीत का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अगले पचास वर्षों के लिए हमारे संकल्प की घोषणा है. SMRITI के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ब्रिटेन में भारत का योगदान कभी नहीं भुलाया जाए. वहीं इंडिया ग्लोबल फोरम के संस्थापक एवं अध्यक्ष मनोज लाडवा ने कहा कि जब दोनों देश व्यापार, प्रौद्योगिकी और साझा मूल्यों के माध्यम से एक नए अध्याय को आकार दे रहे हैं, तो हमें भविष्य के बारे में साहसपूर्वक सोचना होगा. प्रवासी समुदाय अब केवल एक सेतु (Bridge) नहीं है—यह एक इंजन है. SMRITI ठीक वही पहल है जो हमें याद दिलाती है कि हम कहां से आए हैं, ताकि हम जान सकें कि हम कहां जा रहे हैं. भारत-यूके संबंध अब केवल इतिहास की साझेदारी नहीं, बल्कि निरंतरता की साझेदारी है.

ये हस्तियां रहीं मौजूद

इस ऐतिहासिक शाम को कई गणमान्य हस्तियों ने अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया इस दौरान लॉर्ड रामी रेंजर (हाउस ऑफ लॉर्ड्स), लॉर्ड उदय नागराजू (हाउस ऑफ Lords), वीरेंद्र शर्मा (पूर्व सांसद), नवेंदु मिश्रा (सांसद), डॉ. एम. एन. नंदकुमार (कार्यकारी निदेशक, द भवन्स) मौजूद रहे.समारोह के दौरान संगठन के वरिष्ठ पूर्व पदाधिकारियों धीरज शाह, हसमुख शाह, भरत शाह, रजनीकांत मिस्त्री,  जेयू शाह और मयूर शाह को उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। और कोर टीम मे, नीलिमा चेरला , मनोज मिश्रा एव सुधीर पांडेय व्यवस्था मे रहे। वहीं, कार्यक्रम की कुशल एंकरिंग रजनी नेगी ने की, पैनल चर्चा की अध्यक्षता श्वेता मोहंती ने की, पुरस्कार समारोह का संचालन सुशील रापटवार ने किया और राहुल सुब्रमण्यन ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

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