डोनाल्ड ट्रम्प 8 साल बाद चीन पहुंचे हैं। शी जिनपिंग के साथ व्यापार, ईरान युद्ध और ताइवान पर बातचीत होगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान से निपटने के लिए उन्हें चीन की जरूरत नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आठ साल बाद चीन दौरे पर बीजिंग पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां चीनी उपराष्ट्रपति हान जेंग समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। ट्रम्प के साथ उनके बेटे एरिक ट्रम्प और बहू लारा ट्रम्प भी इस यात्रा में शामिल हैं। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा। अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, ईरान युद्ध, ताइवान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों के बीच हो रही यह मुलाकात वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रम्प ने साफ कहा था कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए उन्हें चीन की मदद की जरूरत नहीं है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत पर दुनिया की नजर टिक गई है।
बीजिंग एयरपोर्ट पर ट्रम्प का खास स्वागत
बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ट्रम्प के स्वागत के लिए खास इंतजाम किए गए थे। करीब 300 बच्चे अमेरिका और चीन के झंडे लहराते नजर आए। बच्चों ने मंदारिन भाषा में ‘वेलकम’ के नारे भी लगाए। चीन में इस तरह का स्वागत सिर्फ प्रोटोकॉल नहीं माना जाता, बल्कि इसे कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जाता है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव के बावजूद संवाद के दरवाजे खुले हैं। ट्रम्प 15 मई तक चीन में रहेंगे। इस दौरान शी जिनपिंग के साथ कई दौर की बैठकें होंगी।
व्यापार से लेकर ईरान तक मुद्दों पर होगी चर्चा
व्हाइट हाउस के मुताबिक ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच व्यापार, ताइवान, रेयर अर्थ मिनरल्स, AI और मध्य पूर्व संकट जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी। ईरान युद्ध भी एजेंडे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका लगातार चीन पर ईरानी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है। वॉशिंगटन का मानना है कि चीन की खरीदारी से तेहरान को आर्थिक ताकत मिल रही है। हालांकि चीन पहले ही साफ कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति बाहरी दबाव से तय नहीं होगी। बीजिंग सस्ते तेल और ऊर्जा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बता रहा है।
9 लाख करोड़ की विमान डील पर टिकी नजर
ट्रम्प के साथ इस दौरे में अमेरिका के कई बड़े कारोबारी भी पहुंचे हैं। इनमें इलॉन मस्क, एप्पल CEO टिम कुक और बोइंग CEO शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन और बोइंग के बीच 9 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विमान डील हो सकती है। इसमें 500 बोइंग 737 MAX और 100 ड्रीमलाइनर विमानों की खरीद शामिल बताई जा रही है। अगर यह समझौता होता है तो इसे एविएशन इतिहास की सबसे बड़ी डील्स में गिना जाएगा। इससे अमेरिका की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
मार्को रुबियो पर चीन ने निकाला नया रास्ता
इस दौरे की एक और दिलचस्प बात अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लेकर सामने आई। चीन पहले ही उन पर प्रतिबंध लगा चुका था, क्योंकि वह उइगर मुसलमानों और हांगकांग मुद्दे पर लगातार चीन की आलोचना करते रहे हैं। लेकिन इस बार चीन ने तकनीकी रास्ता अपनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजिंग ने रुबियो के नाम का चीनी ट्रांसलिटरेशन बदल दिया, ताकि पुराने प्रतिबंध नए नाम पर लागू न हों। कूटनीतिक हलकों में इसे चीन की “व्यावहारिक रणनीति” के तौर पर देखा जा रहा है। यानी टकराव के बावजूद बातचीत जारी रखने की कोशिश।
अमेरिकी किसानों और बाजार की भी नजर
ट्रम्प की चीन यात्रा सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं है। अमेरिकी किसान भी इस दौरे से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं। ट्रेड वॉर और टैरिफ विवाद के बाद चीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीद कम कर दी थी, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। बाद में चीन ने फिर खरीद शुरू की, लेकिन किसान अब स्थायी और लिखित समझौता चाहते हैं। व्हाइट हाउस का दावा है कि इस साल चीन 2.5 करोड़ मीट्रिक टन अमेरिकी सोयाबीन खरीद सकता है। अगर ऐसा होता है तो ट्रम्प इसे घरेलू राजनीति में बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकते हैं।