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Artemis 2 Moon Mission Orion Update

पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला ओरियन, 34000KM/hour रफ्तार से चांद की ओर दौड़

आर्टेमिस-2 मिशन चांद की ओर बढ़ा, ओरियन ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी, 34 हजार किमी/घंटा रफ्तार से सफर जारी।


पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकला ओरियन 34000kmhour रफ्तार से चांद की ओर दौड़

America Moon Mission |

अंतरिक्ष की खामोशी में एक और ऐतिहासिक सफर शुरू हो चुका है। धरती से निकलकर अब इंसान फिर चांद की ओर लौट रहा है। लेकिन इस बार तकनीक और सटीकता दोनों की असली परीक्षा है। हर सेकंड की गणना, हर छोटी चाल… क्योंकि यहां जरा सी गलती का मतलब रास्ता भटकना भी हो सकता है।

ट्रांसलूनर इंजेक्शन: यहीं से बदल गया सफर

Artemis II मिशन ने लॉन्च के करीब एक दिन बाद वह अहम चरण पार कर लिया, जिसे ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न कहा जाता है। सुबह करीब 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने अपने थ्रस्टर्स करीब 6 मिनट तक फायर किए। फिर पृथ्वी की कक्षा को पीछे छोड़ दिया। इसी प्रक्रिया ने इसकी रफ्तार को बढ़ाकर लगभग 34 हजार किमी प्रति घंटा कर दिया। 

यही वो मोड़ है जहां से यान सीधे चांद की ओर बढ़ना शुरू करता है। एक ऐसा रास्ता, जहां इंसानों की मौजूदगी बेहद सीमित रही है।

अब ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी’ पर भरोसा

ओरियन अब जिस रास्ते पर है, उसे ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी’ कहा जाता है। सरल भाषा में समझें तो यह ऐसा रास्ता है, जहां यान न्यूटन के पहले नियम के मुताबिक अपनी गति से आगे बढ़ता रहता है। बीच-बीच में इंजन सिर्फ छोटे सुधार के लिए ही इस्तेमाल होंगे।

यही वजह है कि इस चरण को बेहद संवेदनशील माना जाता है। क्योंकि अगर दिशा में थोड़ा भी अंतर आया तो यान चांद से टकरा सकता है या फिर अंतरिक्ष में भटक सकता है।

गुरुत्वाकर्षण का खेल: कभी धीमी, कभी तेज रफ्तार

अगले कुछ दिनों में जैसे-जैसे यान पृथ्वी से दूर जाएगा, उसकी गति धीरे-धीरे कम होगी। लेकिन जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा, उसकी रफ्तार फिर बढ़ने लगेगी। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई गेंद ढलान से उतरते वक्त अचानक तेज हो जाती है।

छठे दिन: खिड़की से दिखेगा ‘बास्केटबॉल’ जैसा चांद

मिशन का सबसे रोमांचक पल छठे दिन आएगा। जब ओरियन चांद की सतह से महज 6400 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को देख पाएंगे। जो धरती से कभी दिखाई नहीं देता। खिड़की से झांकने पर चांद इतना बड़ा नजर आएगा, जैसे हाथ के पास रखा बास्केटबॉल।

इसी दौरान एक और चुनौती सामने आएगी। करीब 50 मिनट का कम्युनिकेशन ब्लैकआउट होगा। जब यान चांद के पीछे होगा तब पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा।

टूट सकता है अपोलो-13 का रिकॉर्ड

यह मिशन दूरी के मामले में भी इतिहास बना सकता है। Apollo 13 ने 1970 में पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी का रिकॉर्ड बनाया था। अब उम्मीद है कि आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री इस रिकॉर्ड को पार करते हुए करीब 4 लाख किलोमीटर से भी ज्यादा दूर पहुंचेंगे।

चांद की गुरुत्वाकर्षण से ‘गुलेल’ की तरह वापसी

सातवें दिन यान चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल करेगा। कुछ उसी तरह जैसे गुलेल पत्थर को वापस फेंकती है। यह तकनीक यान को बिना ज्यादा ईंधन खर्च किए पृथ्वी की ओर लौटने में मदद करती है। पूरे मिशन में अंतरिक्ष यात्री करीब 11 लाख किलोमीटर का सफर तय करेंगे।

10 अप्रैल: समुद्र में होगा सफर का आखिरी पड़ाव

भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल की सुबह ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। कुछ ही मिनटों बाद यह प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। जहां से मिशन का अंतिम चरण पूरा होगा। इसके बाद पूरी दुनिया को इस ऐतिहासिक यात्रा के अनुभव साझा किए जाएंगे।

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