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अनिल मेनन का ISS मिशन

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन कल भरेंगे ISS के लिए उड़ान, 8 महीने तक करेंगे अंतरिक्ष में वैज्ञानिक शोध

भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को ISS के लिए उड़ान भरेंगे। वे वहां 8 महीने तक रहकर मानव स्वास्थ्य और नई तकनीकों पर शोध करेंगे।


भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन कल भरेंगे iss के लिए उड़ान 8 महीने तक करेंगे अंतरिक्ष में वैज्ञानिक शोध

भारतीय मूल के नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को अपने पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशन के लिए रवाना होंगे। इस मिशन के तहत वह करीब आठ महीने तक अंतरिक्ष में रहकर चिकित्सा, मानव स्वास्थ्य, नई प्रौद्योगिकी और भविष्य के मानव अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अनुसंधानों में हिस्सा लेंगे। यह उनका पहला आईएसएस मिशन है और इसे नासा के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अभियान माना जा रहा है।

रूस के सोयुज MS-29 से करेंगे उड़ान

अनिल मेनन रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान से कजाखस्तान के बाइकोनूर कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरेंगे। इस मिशन में उनके साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकीना भी शामिल होंगी। तीनों अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक्सपेडिशन-74 और एक्सपेडिशन-75 के सदस्य के रूप में कार्य करेंगे। मिशन के पूरा होने के बाद उनका पृथ्वी पर लौटने का कार्यक्रम अप्रैल 2027 में निर्धारित है।

भारतीय पिता और यूक्रेनी मां के बेटे हैं अनिल

अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय मूल के हैं, जबकि उनकी मां यूक्रेनी मूल की हैं। वह पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन फिजिशियन हैं और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर भी कार्यरत हैं। चिकित्सा और अंतरिक्ष विज्ञान दोनों क्षेत्रों में उनका अनुभव उन्हें नासा के प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल करता है।

नासा और स्पेसएक्स में निभा चुके हैं अहम भूमिका

अनिल मेनन ने वर्ष 2014 में नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद 2018 में वह स्पेसएक्स से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी के मेडिकल प्रोग्राम की स्थापना की और पहले मानव अंतरिक्ष मिशनों की तैयारियों में अहम योगदान दिया। उन्होंने भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों के लिए विकसित किए जा रहे स्टारशिप कार्यक्रम से जुड़े कार्यों में भी हिस्सा लिया।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए अहम होगा यह अभियान

नासा के अनुसार, इस मिशन के दौरान किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रयोग अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य, नई तकनीकों के विकास और भविष्य के चंद्रमा एवं मंगल अभियानों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारतीय मूल के वैज्ञानिक अनिल मेनन का यह मिशन वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के साथ-साथ भारतीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय माना जा रहा है।

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