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West Bengal Malda hostage case Supreme Court angry

मालदा में बवाल: SIR में लगे 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर घंटों बंधक, सुप्रीम कोर्ट सख्त

पश्चिम बंगाल के मालदा में 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर बंधक बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। वोटर लिस्ट विवाद से भड़का गुस्सा, कानून व्यवस्था पर सवाल।


मालदा में बवाल sir में लगे 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर घंटों बंधक सुप्रीम कोर्ट सख्त

Observer Hostage in West Bengal |

पश्चिम बंगाल के मालदा से आई एक घटना ने चुनावी व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सात इलेक्शन ऑब्जर्वर को घंटों तक बंधक बनाए जाने की खबर जैसे ही सामने आई। मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया और वहां से कड़ी नाराजगी भी दिखी।

शुरुआत कैसे हुई?

दरअसल, बुधवार के दिन मालदा जिले का माताबारी इलाके में सुबह से ही माहौल गरम था। वोटर लिस्ट से नाम कटने को लेकर लोग छोटे-छोटे समूहों में इकट्ठा होने लगे। देखते ही देखते भीड़ हजारों में बदल गई। दोपहर करीब 2 बजे, सात इलेक्शन ऑब्जर्वर जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं सभी BDO ऑफिस पहुंचे। वे एसआईआर (Special Intensive Revision) से जुड़े काम की समीक्षा करने आए थे। लेकिन उनके पहुंचते ही हालात तेजी से बिगड़ गए।

जब ऑफिस बना घेराव का केंद्र

ऑफिस के बाहर पहले से मौजूद लोगों को जैसे ही अधिकारियों के आने की खबर मिली। उन्होंने पूरा परिसर घेर लिया। लोगों की मांग थी कि अधिकारी बाहर आकर उनकी बात सुनें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहीं से तनाव बढ़ा। ऑफिस के अंदर मौजूद सातों अधिकारी बाहर नहीं निकल पाए। यह स्थिति करीब 9 घंटे तक बनी रही।

खाना-पानी तक नहीं मिला

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि बंधक बनाए गए अधिकारियों को इस दौरान खाना-पानी तक नहीं मिल पाया। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि यह घटना 'सोची-समझी और भड़काऊ' लगती है। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश हो सकती हैं।

राज्य सरकार से जवाब तलब

कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति बनने पर उन्होंने क्या कदम उठाए। बेंच ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है। जानकारी अनुसार, कई घंटे तक गतिरोध जारी रहा। जब स्थिति काबू से बाहर जाने लगी तब पुलिस को बुलाया गया। 

पुलिस सुरक्षा में अधिकारियों को बाहर निकाला गया। लेकिन रास्ता भी आसान नहीं था। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने की कोशिश की। जिस गाड़ी से अधिकारियों को निकाला गया। उस पर ईंटें फेंकी गईं और शीशे तोड़ दिए गए।

आखिर क्यों भड़का इतना गुस्सा?

इस पूरे विवाद की जड़ में है SIR प्रक्रिया यानी मतदाता सूची का विशेष संशोधन। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त नोटिस के हजारों नाम सूची से हटा दिए गए।

कितने इलाके प्रभावित?

मालदा जिले के 100 से ज्यादा गांव इस संशोधन से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कुछ जगहों के आंकड़े शामिल हैं। इनमें शिलालमपुर (कालियाचक-2)में 427 नाम हटे, अन्य गांव में 50 से 200 नाम हटने की जानकारी सामने आई। कुल मिलाकर 5% से 10% मतदाताओं के नाम समीक्षा सूची में गए। इनमें से कई हट गए।

नाम कटने के पीछे क्या वजह बताई गई?

प्रशासनिक स्तर पर कुछ कारण सामने आए हैं:

-दस्तावेजों में कमी
-कई मामलों में जमा किए गए कागजात को अपूर्ण या अप्रमाणित माना गया।
-लंबे समय से अनुपस्थिति
-कुछ लोगों के बारे में कहा गया कि वे दिए गए पते पर स्थायी रूप से नहीं रहते, खासकर प्रवासी मजदूर।
-तकनीकी गड़बड़ी
-डेटाबेस अपडेट के दौरान डुप्लीकेट एंट्री या जन्मतिथि जैसी गलतियों के कारण भी नाम हटाए गए।

फिलहाल हालात पर नजर

घटना के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है। प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर है।

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