पश्चिम बंगाल में मतगणना के बीच भाजपा 191 सीटों पर आगे चल रही है। भवानीपुर में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं, जहां काउंटिंग के दौरान तनाव भी देखने को मिला।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। मतगणना के रुझानों में भाजपा भारी बढ़त के साथ आगे निकलती नजर आ रही है। 293 सीटों पर जारी गिनती के बीच भाजपा 191 सीटों पर आगे है, जबकि टीएमसी 88 सीटों पर सिमटी दिख रही है। शुरुआती नतीजों में भी भाजपा ने बढ़त को जीत में बदलना शुरू कर दिया है।
इस बीच भवानीपुर सीट पूरे राज्य का सबसे हाई प्रोफाइल मुकाबला बन गई है, जहां माहौल सिर्फ चुनावी नहीं बल्कि तनावपूर्ण भी नजर आया।
भवानीपुर बना सियासी केंद्र
भवानीपुर सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। ममता बनर्जी यहां भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी से करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। दोनों नेता खुद काउंटिंग सेंटर पहुंचे, जिससे इस सीट की अहमियत और बढ़ गई। आमतौर पर ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि दोनों बड़े चेहरे एक साथ मौजूद हों।
काउंटिंग के बीच रुकी प्रक्रिया, बढ़ा तनाव
भवानीपुर के सखावत मेमोरियल स्कूल काउंटिंग सेंटर में करीब 45 मिनट तक गिनती रुकी रही। इससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। बाद में प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई, लेकिन इस दौरान सुरक्षा को लेकर प्रशासन और ज्यादा सतर्क हो गया। अभिषेक बनर्जी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया।
भारी सुरक्षा के बीच काउंटिंग
काउंटिंग सेंटर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। दोनों उम्मीदवारों को अंदर जाने से पहले फोन जमा करने को कहा गया। इससे साफ संकेत मिला कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद से बचना चाहता है। ग्राउंड पर मौजूद माहौल यह दिखाता है कि यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि सत्ता की बड़ी लड़ाई बन चुकी है।
कोलकाता में भाजपा दफ्तर में जश्न
जहां एक तरफ काउंटिंग सेंटर पर तनाव दिखा, वहीं दूसरी ओर कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। साल्ट लेक स्थित पार्टी दफ्तर में कई बड़े नेता मौजूद रहे। कार्यकर्ता नतीजों के रुझान आते ही जश्न मनाते नजर आए। यह संकेत देता है कि पार्टी को बंगाल में बड़ी जीत की उम्मीद है और कार्यकर्ताओं का उत्साह उसी दिशा में बढ़ रहा है।
क्या संकेत दे रहे हैं ये रुझान
अगर यही रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है। टीएमसी के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है, जबकि भाजपा के लिए यह राज्य में विस्तार का बड़ा मौका बन सकता है। अब नजर अंतिम नतीजों पर है, जो तय करेंगे कि बंगाल की सत्ता किसके हाथ जाएगी।