Stock Market Rally: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने लंबी छलांग लगाई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1600 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 400 अंकों से अधिक चढ़ गया। बाजार में इस तेजी के पीछे अमेरिका से आई राजनीतिक खबर और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट को बड़ी वजह माना जा रहा है।
दरअसल, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलने से वैश्विक बाजारों का माहौल बदला है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। विदेशी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।
खुलते ही 1600 अंक से ज्यादा उछला सेंसेक्स
गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद स्तर 77,301 से तेजी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में ही इसमें 1,621 अंकों की उछाल दर्ज की गई और यह 78,922 के स्तर पर पहुंच गया।वहीं, एनएसई निफ्टी ने भी जोरदार शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में 23,960 पर बंद हुआ निफ्टी शुरुआती कारोबार में 432 अंक चढ़कर 24,392 के स्तर पर पहुंच गया।बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के चेहरे खिल गए। खास बात यह रही कि कारोबार की शुरुआत से ही खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
ट्रंप की चुनावी हार से क्यों झूम उठा शेयर बाजार?
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने वैश्विक बाजारों का रुख बदल दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ है, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में बहुमत हासिल करने का दावा किया है।चुनावी नतीजों को अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों के खिलाफ मतदाताओं के रुख के तौर पर देखा जा रहा है। इससे निवेशकों को अमेरिका की व्यापार और विदेश नीति में संभावित बदलाव की उम्मीद बंधी है।अमेरिकी बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। डाउ जोन्स में जोरदार तेजी दर्ज की गई। इसका असर एशियाई बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में 10% की भारी गिरावट
शेयर बाजार में तेजी की दूसरी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का गिरना है। अमेरिकी चुनाव के नतीजों और ईरान के साथ जारी तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जाती है.दरअसल, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल घटने और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है।