US Iran Attack: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से कुछ घंटे पहले ईरान के रणनीतिक केश्म द्वीप पर पांच धमाकों की खबर सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने द्वीप पर सीमित सैन्य हमले किए। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, मंगलवार को केश्म द्वीप पर लगातार पांच धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके अलावा ईरान के बंदर लेंगेह शहर में भी विस्फोटों की खबरें आईं। स्थानीय लोगों ने द्वीप के ऊपर दो विमानों को उड़ते हुए देखने की बात कही है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, केश्म द्वीप पर की गई कार्रवाई रक्षात्मक प्रकृति की थी। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरानी सैन्य बलों की ओर से अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने सीमित कार्रवाई की। हालांकि, धमाकों में कितना नुकसान हुआ और क्या किसी की जान गई, इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ओर से भी इस घटना पर विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है
ईरान का दावा- दो अमेरिकी जासूसी ड्रोन मार गिराए
केश्म द्वीप पर धमाकों की खबरों के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो अमेरिकी टोही ड्रोन मार गिराने का दावा किया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने बताया कि उसके बलों ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दक्षिणी केश्म क्षेत्र में दो अमेरिकी MQM-170 टोही ड्रोन को इंटरसेप्ट किया और अपने कब्जे में ले लिया। ईरान ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई के बाद उसके पास इस मॉडल के चार अमेरिकी ड्रोन हो गए हैं। इसके अलावा ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को नष्ट करने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी पक्ष ने पहले भी ईरान के कुछ ड्रोन संबंधी दावों को खारिज किया है
होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण बढ़ी चिंता
केश्म द्वीप ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस समुद्री रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे में इस इलाके में किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रह सकता। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, तेल की आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होने की आशंका रहती है।
ट्रंप के बयान के बीच सैन्य घटनाक्रम
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों के बीच सामने आया है, जिनमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित समझौते की उम्मीद जताई थी। ट्रंप ने कहा था कि ईरान समझौता करना चाहता है और तेल की कीमतों में गिरावट इस बात का संकेत है कि युद्ध की आशंका कम हो सकती है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत में प्रगति होने की बात कही थी। ऐसे में एक तरफ कूटनीतिक बातचीत और दूसरी तरफ केश्म द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबरों ने हालात को और जटिल बना दिया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।