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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: WFH और VC सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बदलाव: अब सोमवार-शुक्रवार VC सुनवाई और WFH, जानिए और क्या बदलाव होंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई का फैसला लिया है। साथ ही कार-पूलिंग और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। जानिए पूरा बदलाव क्या है।


सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बदलाव अब सोमवार-शुक्रवार vc सुनवाई और wfh जानिए और क्या बदलाव होंगे

देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट ने अपने कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव करते हुए एक नया डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। नए निर्देशों के अनुसार अब सोमवार और शुक्रवार को मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाएगी। साथ ही कोर्ट स्टाफ के लिए वर्क फ्रॉम होम और कार-पूलिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। 

दरअसल, यह फैसला सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि न्यायिक प्रणाली को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यही वजह है कि Supreme Court Video Hearing और Work From Home व्यवस्था चर्चा में है।

सोमवार और शुक्रवार को अब सिर्फ वीडियो सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक अब सप्ताह के कुछ तय दिनों सोमवार और शुक्रवार को मामलों की सुनवाई पूरी तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।  अब समझिए, इसका मकसद सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि समय और संसाधनों की बचत भी है। रजिस्ट्रार को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वीडियो लिंक समय पर उपलब्ध कराए जाएं और तकनीकी व्यवस्था में कोई बाधा न आए।

 कार-पूलिंग को मिलेगा बढ़ावा

सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है।  इसका उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना बताया गया है। फिलहाल, बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच यह फैसला एक संतुलित पहल के रूप में देखा जा रहा है।

कोर्ट स्टाफ के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अब हर शाखा में 50 प्रतिशत स्टाफ सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम कर सकेगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि सभी कर्मचारी फोन और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध रहेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्यालय आना होगा।  ऐसे में यह व्यवस्था लचीलापन भी देती है और काम की निरंतरता भी सुनिश्चित करती है।

क्या यह सिर्फ कोर्ट तक सीमित रहेगा?

 अब चर्चा में है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का यह मॉडल आगे चलकर अन्य सरकारी विभागों के लिए भी उदाहरण बनेगा। फिलहाल, सरकार और कई राज्यों में पहले से ही वर्क फ्रॉम होम और ईंधन बचत जैसी नीतियों पर काम हो रहा है।  

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