करूर भगदड़ मामले में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दौरे पर रोक की मांग वाली DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका वापस लेने की सलाह दी।
करूर भगदड़ मामले की जांच के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के प्रस्तावित दौरे को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने DMK को कड़ी टिप्पणी के साथ घेरा। अदालत ने साफ कहा कि किसी मुख्यमंत्री के दौरे या उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों को नियंत्रित करना न्यायालय का काम नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या अब यह भी अदालत तय करेगी कि मुख्यमंत्री क्या करें और क्या नहीं। न्यायालय की इस टिप्पणी के बाद DMK ने अपनी याचिका वापस लेने पर सहमति जता दी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जताई आपत्ति
जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुख्यमंत्री की मुलाकात को गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कैसे माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है तो दूसरे पक्ष को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। पीठ ने संकेत दिया कि यदि याचिका वापस नहीं ली गई तो उसे खारिज किया जा सकता है।
DMK ने आखिर क्यों दायर की थी याचिका
DMK के सचिव आर.एस. भारती ने याचिका में मांग की थी कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुन और मामले के अन्य आरोपियों को CBI जांच पूरी होने तक इस केस पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों से उनकी बातचीत पर भी निगरानी या नियंत्रण की मांग की गई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि मुख्यमंत्री के 10 जुलाई के करूर दौरे से गवाह प्रभावित हो सकते हैं।
करूर दौरे को लेकर क्या था विवाद
याचिका में उन खबरों का हवाला दिया गया था जिनमें कहा गया कि मुख्यमंत्री करूर जाकर मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्तियां और अन्य राहत संबंधी लाभ सौंपेंगे। DMK का दावा था कि इस दौरान दिए जाने वाले सार्वजनिक बयान CBI जांच को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं याचिका में TVK विधायक आधव अर्जुन के उस बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर पिछली DMK सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।
CBI जांच पहले से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में
करूर भगदड़ मामले की जांच पहले ही सुप्रीम कोर्ट CBI को सौंप चुका है। अदालत ने जांच की निगरानी के लिए पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय निगरानी समिति भी गठित की थी। साथ ही तमिलनाडु सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल और एकल सदस्यीय जांच आयोग से जुड़े आदेशों पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को CBI जांच में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया गया था।
41 लोगों की मौत के बाद बना राष्ट्रीय मुद्दा
करूर में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस के अनुसार कार्यक्रम में अनुमान से लगभग तीन गुना अधिक भीड़ पहुंची थी और आयोजन के दौरान हुई लंबी देरी भी हादसे की एक बड़ी वजह बताई गई थी। इसी घटना की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही CBI जांच के आदेश दिए थे, जिसे अब उसकी निगरानी में आगे बढ़ाया जा रहा है।