सोमनाथ मंदिर के 75 साल पूरे होने पर भव्य अमृत महोत्सव मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड शो किया, जलाभिषेक और एयर शो ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आज भव्य अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने पर देश-विदेश से श्रद्धालु और अतिथि शामिल हुए।


पीएम मोदी ने किया अभिषेक

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 किलोमीटर लंबा रोड शो करते हुए मंदिर पहुंचे और विशेष शिवाभिषेक किया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य अनुष्ठानों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया।
सोमनाथ अमृत महोत्सव का ऐतिहासिक महत्व
यह आयोजन 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। इसे “सोमनाथ अमृत महोत्सव” नाम दिया गया है।इस अवसर पर 11 तीर्थों के पवित्र जल से मंदिर के शिखर का अभिषेक किया गया, जिसे 90 मीटर ऊंची क्रेन की मदद से संपन्न कराया गया।
पीएम मोदी का रोड शो और जलाभिषेक



प्रधानमंत्री मोदी ने रोड शो के दौरान सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और मंदिर परिसर पहुंचकर विशेष पूजा की। इसके बाद उन्होंने रिमोट के माध्यम से कुंभाभिषेक की प्रक्रिया पूरी की।पूरे आयोजन में गुजरात के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे और हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
एयर शो और फूलों की बारिश ने बढ़ाया आकर्षण

कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम द्वारा किया गया 15 मिनट का एयर शो रहा।वायुसेना के विमानों ने आसमान में तिरंगे के रंगों का अद्भुत प्रदर्शन किया। इसके अलावा चेतक हेलिकॉप्टर से मंदिर परिसर पर फूलों की वर्षा की गई, जिससे वातावरण और भी भव्य हो गया।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक गौरव

सोमनाथ मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है। वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण में इसे नुकसान पहुंचा था, जिसकी स्मृति में इस वर्ष उस घटना के 1000 साल भी पूर्ण हुए।आज यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और पुनर्निर्माण शक्ति का प्रतीक भी बन चुका है।
भव्य आयोजन में देशभर की भागीदारी

इस कार्यक्रम में देशभर से आए साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ।इस ऐतिहासिक आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि गुजरात की भूमि न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विरासत का जीवंत प्रतीक भी है।