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श्रीराम जन्मभूमि न्यास की अहम बैठक

न्यास ने स्वीकार किए चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे, श्री कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव

श्रीराम जन्मभूमि न्यास की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव। न्यास ने CEO के लिए समिति गठित की।


न्यास ने स्वीकार किए चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे श्री कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की अहम बैठक में लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की अहम बैठक सोमवार को हुई। इसमें न्यास ने महासचिव श्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। श्री राय के स्थान पर नए न्यासी एवं सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी श्री कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है।

न्यास ने उपयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति में न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं।न्यास की बैठक में चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में कथित अनियमितता को लेकर सदस्य एवं पदाधिकारी आहत और चिंतित दिखाई दिए। बैठक में इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण पर गंभीर खेद भी व्यक्त किया गया।

न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि मंदिर को दिए गए दान में अनियमितता से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने के बाद न्यास ने शासन से निष्पक्ष जांच का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि न्यास का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी हो, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। श्री गिरि ने बताया कि नए महामंत्री की नियुक्ति तक न्यासी श्री कृष्ण मोहन अंतरिम महामंत्री का दायित्व संभालेंगे। वहीं, श्री चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा नैतिक आधार पर दिए गए त्यागपत्र को बैठक में स्वीकार कर लिया गया।

साथ ही, न्यास ने गोपाल नागरकोटे का नाम विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का निर्णय लिया है। बैठक में प्रबंधन एवं संचालन प्रणाली की कमजोरियों को दूर कर उसे और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण का उपयोग श्री रामलला मंदिर, श्रीराम जन्मभूमि, हिंदू समाज और व्यापक हिंदू आस्था को कमजोर करने के अवसर के रूप में करने का प्रयास कर रहे हैं।

बैठक से जुड़ी प्रमुख जानकारी

  • 31 मार्च 2026 तक कुल चढ़ावा: 582 करोड़, जिसमें से 391 करोड़ खर्च किए गए, जबकि शेष राशि बैंक में उपलब्ध है।
  • दान के माध्यम से अब तक 3,264 करोड़ प्राप्त हुए, जिनमें से 2,370 करोड़ मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किए गए।
  • गोपाल नागरकोटे का नाम विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का निर्णय लिया गया।
  • नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं से 2,926 भेंटें प्राप्त हुईं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज है।
  • चांदी की वस्तुओं को सरकारी टकसाल में गलाकर चांदी की छड़ें बनाई गई हैं।

स्वदेश से विशेष बातचीत

राम मंदिर को राजनीति का केंद्र बनाना बंद करे विपक्ष : जैन

समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दल राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिल यादव सहित विपक्ष के सभी नेताओं को राम मंदिर को राजनीति का केंद्र बनाना बंद करना चाहिए। वे जो भी आरोप लगा रहे हैं, उन्हें साक्ष्य और सबूतों के साथ एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें तथा पारदर्शी और निष्पक्ष जांच में सहयोग करें।

स्वदेश से विशेष बातचीत में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मामले में यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।उन्होंने राम भक्तों से धैर्य बनाए रखने और जांच पूरी होने तक किसी भी अफवाह या राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह समझना चाहिए कि विभिन्न स्रोतों से शिकायतें मिलने के बाद इस बार स्वयं ट्रस्ट ने ही उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी जांच कराने का अनुरोध किया है।

मंदिर की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

श्री जैन ने कहा, "राम किसी दल या व्यक्ति की संपत्ति नहीं हैं। 500 वर्षों के संघर्ष और असंख्य बलिदानों के बाद बने इस मंदिर की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।"उन्होंने कहा कि विहिप राम मंदिर के मुद्दे पर पहले भी कई अग्निपरीक्षाओं से गुजरा है। इस बार भी यह विहिप के लिए अग्निपरीक्षा है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद इस परीक्षा में भी बेदाग निकलेगा। उन्होंने कहा कि इतने आरोपों के बावजूद अयोध्या में राम भक्तों की दर्शन के लिए आने वाली संख्या में कोई कमी नहीं आई है।

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