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RG Kar Case IPS Suspension

RG Kar केस में बड़ा एक्शन, 3 IPS अधिकारी सस्पेंड; जांच में लापरवाही पर ममता सरकार का कदम

कोलकाता के RG कर अस्पताल रेप-मर्डर केस में जांच में लापरवाही के आरोपों के चलते 3 वरिष्ठ IPS अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। मामला 2024 की घटना से जुड़ा है।


rg kar केस में बड़ा एक्शन 3 ips अधिकारी सस्पेंड जांच में लापरवाही पर ममता सरकार का कदम

West Bengal News |

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए रेप और मर्डर केस में बड़ा अपडेट हुआ है। केस को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मामले की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही और गंभीर कर्तव्य चूक के आरोपों के चलते तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई उस बहुचर्चित घटना से जुड़ी है। इसने 2024 में पूरे देश को झकझोर दिया था।

दरअसल, एक महिला ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था। इसमें बाद में रेप और हत्या की आशंका सामने आई थी और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। अब इस पुराने मामले की जांच में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में यह सस्पेंशन अहम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि जांच के शुरुआती चरण में गंभीर खामियां सामने आई थीं।

लापरवाही के आरोप में तीन IPS पर एक्शन

राज्य सचिवालय में हुई घोषणा के मुताबिक कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, पूर्व उपायुक्त इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता को सस्पेंड किया गया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मामले की शुरुआती जांच में लापरवाही बरती और कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया। सरकार ने इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का आदेश भी दिया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब इस केस को लेकर पहले ही पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।

पीड़िता के परिवार के आरोप और जांच पर सवाल

मामले में पीड़िता के परिवार ने पहले भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की गई और मामले को दबाने की कोशिश की गई। इसके अलावा यह भी आरोप सामने आए थे कि पीड़िता के परिजनों को कथित तौर पर पैसे की पेशकश की गई थी और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी गई। इन सभी आरोपों ने इस केस को सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रहने दिया, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए।

CBI जांच और गिरफ्तारी के बाद बढ़ा मामला

घटना के बाद पुलिस ने एक सिविक वॉलंटियर को गिरफ्तार किया था। बाद में जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई। सीबीआई ने जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की और अलग-अलग पहलुओं को खंगाला। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे मामले में कई प्रशासनिक खामियां सामने आती गईं। इस केस ने देशभर में मेडिकल संस्थानों में महिला सुरक्षा और अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी थी।

2024 की घटना जिसने पूरे देश को हिला दिया

अगस्त 2024 में हुई इस घटना में महिला ट्रेनी डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था। शुरुआती जांच में रेप और हत्या की पुष्टि की आशंका जताई गई थी। इसके बाद देशभर में डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। अस्पतालों की सुरक्षा, नाइट ड्यूटी व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल उठे।

अब इसी केस से जुड़े पुराने पहलुओं की जांच में यह सस्पेंशन एक बड़ा प्रशासनिक संकेत माना जा रहा है, जिससे पूरे मामले की जिम्मेदारी और जवाबदेही फिर से चर्चा में आ गई है।

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