स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धांजलि दी। पीएम ने कहा कि उनके विचार विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचार और आध्यात्मिक संदेश आज भी करोड़ों युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन और दर्शन विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करता है। वहीं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए युवाओं के लिए उनका जीवन प्रेरणास्रोत बताया।
पीएम मोदी ने एक्स पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि स्वामी विवेकानंद की अद्वितीय बुद्धिमत्ता और प्रेरणादायी विचार पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना को विश्व पटल पर स्थापित करने में स्वामी विवेकानंद का योगदान अतुलनीय रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका आध्यात्मिक संदेश देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए नई दिशा और नई ऊर्जा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी किया नमन
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन, आत्मविश्वास, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से युवाओं को निरंतर प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री ने उन्हें भारत के महान आध्यात्मिक नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
विश्व मंच पर भारत की आध्यात्मिक पहचान को मिली नई पहचान
12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद, श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे। वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक संबोधन ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा, वेदांत और सार्वभौमिक बंधुत्व का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक विचारों का प्रचार-प्रसार किया तथा भारतीयों को अपनी संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करने का संदेश दिया।
युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा हैं स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का आधार भी है। उन्होंने युवाओं को साहस, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध संदेश "उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको" आज भी लाखों युवाओं को अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
रामकृष्ण मिशन की स्थापना
अपने गुरु के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। यह संस्था आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और मानवीय सेवा के क्षेत्र में भारत सहित कई देशों में कार्य कर रही है। स्वामी विवेकानंद का निधन 4 जुलाई 1902 को मात्र 39 वर्ष की आयु में हुआ था। अल्पायु में ही उन्होंने भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई और आत्मविश्वास से परिपूर्ण राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया, जो आज भी प्रासंगिक बना हुआ है।