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NDA Majority Plan and Pawar MPs

NDA के दो तिहाई बहुमत का मिशन! क्या शरद पवार गुट के सांसद बनेंगे गेमचेंजर?

मानसून सत्र से पहले एनडीए की नजर शरद पवार गुट के 8 सांसदों पर बताई जा रही है। इसके पीछे दो तिहाई बहुमत और संविधान संशोधन विधेयकों को लेकर सियासी रणनीति की चर्चा तेज हो गई है।


nda के दो तिहाई बहुमत का मिशन  क्या शरद पवार गुट के सांसद बनेंगे गेमचेंजर

indian Politics latest news |

नई दिल्ली। मानसून सत्र शुरू होने से पहले केंद्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज है। तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट में हुई राजनीतिक हलचल के बाद अब सियासी नजरें शरद पवार की अगुवाई वाले एनसीपी (एसपी) पर टिक गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के आठ सांसद एनडीए के संपर्क में बताए जा रहे हैं, जिससे संसद के भीतर संख्या बल को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

यह हलचल सिर्फ दल-बदल की संभावनाओं तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसके पीछे संविधान संशोधन से जुड़े अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिशों की भी चर्चा है। इसी वजह से मानसून सत्र शुरू होने से पहले राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज दिखाई दे रही हैं।

शरद पवार गुट के सांसदों पर क्यों टिकी है नजर

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में एनसीपी (शरद पवार) के आठ सांसद एनडीए के संपर्क में हैं। हालांकि अभी किसी तरह का अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यदि राजनीतिक बदलाव होता है तो ये सांसद किस दल का हिस्सा बनेंगे। जानकारी यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी इन सांसदों को सीधे अपने दल में शामिल करने के पक्ष में नहीं है और मंत्री पद दिए जाने की चर्चाओं को भी खारिज किया गया है।

कांग्रेस में विलय की चर्चा से बढ़ी अंदरूनी बेचैनी

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि एनसीपी (शरद पवार) के कुछ सांसद कांग्रेस में संभावित विलय की अटकलों से असहज हैं। यही वजह पार्टी के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। हालांकि एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की संभावनाओं से फिलहाल इनकार किया जा रहा है, लेकिन सांसदों के भविष्य को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।

2029 की राजनीति भी फैसलों पर डाल रही असर

सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों को 2029 के लोकसभा चुनाव में टिकट और अपनी राजनीतिक स्थिति को लेकर भी चिंता है। उनका मानना है कि केंद्र और महाराष्ट्र, दोनों जगह एनडीए की सरकार होने के कारण अपने संसदीय क्षेत्रों में विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं के समाधान में राजनीतिक संतुलन बनाए रखना चुनौती बन रहा है। ऐसे हालात भी उनके राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करने वाले कारकों में गिने जा रहे हैं।

दो तिहाई बहुमत के पीछे क्या है बड़ी रणनीति

सियासी हलकों में माना जा रहा है कि एनडीए संसद में अपने संख्या बल को और मजबूत करने की संभावनाएं तलाश रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य माना जा रहा है। इसी संदर्भ में शरद पवार गुट के सांसदों को लेकर जारी चर्चाओं को महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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