सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के सवाल पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा 'भारत पाकिस्तान जैसा दलाल देश नहीं।' विपक्ष के आरोपों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस।
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच संसद में सर्वदलीय बैठक हुई। इस बार यह बैठक सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रही बल्कि बयानबाजी भी काफी तेज हो गई। बैठक में विपक्ष ने भारत की भूमिका पर सवाल उठाए। तब जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ और तीखा बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान जैसा 'दलाल देश' नहीं है।
विपक्ष का सवाल: भारत क्यों चुप है?
दरअसल, बैठक के दौरान कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि पाकिस्तान इस समय ईरान जंग में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत मूकदर्शक बना हुआ है। उनके इस बयान के बाद बैठक का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया। हालांकि सरकार की तरफ से तुरंत जवाब आया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया जवाब
एस जयशंकर ने साफ कहा कि भारत की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति है। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान की तरह किसी के लिए दलाली नहीं करते हैं। न ही किसी की ओर से मध्यस्थता करते हैं। उनका यह बयान विपक्ष के आरोपों पर सीधा पलटवार माना जा रहा है। बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में करीब दो घंटे तक बैठक चली। इसमें मिडिल ईस्ट के हालात और देश में तेल-गैस की स्थिति पर चर्चा हुई।
बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण समेत कई सीनियर मंत्री मौजूद रहे। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी दूरी बनाए रखी।
सरकार का दावा: स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में
बैठक में सरकार ने भरोसा दिलाया कि वेस्ट एशिया के संकट के बावजूद भारत में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। जिसमें बताया गया कि कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सप्लाई पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। सरकार ने यह भी कहा कि भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के कारण सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है।
कूटनीति पर जोर, संपर्क लगातार जारी
सरकार के मुताबिक, भारत लगातार सभी संबंधित देशों के संपर्क में है और सक्रिय कूटनीति के जरिए हालात पर नजर बनाए हुए है। ईरान द्वारा कुछ समय बाद सप्लाई रूट फिर खोलने को भी सकारात्मक संकेत बताया गया। साथ ही इसे भारत के लिए राहत भरा कदम माना गया।
विपक्ष संतुष्ट नहीं, संसद में बहस की मांग
हालांकि, सरकार के जवाबों से विपक्ष पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। बता दें कि इस बैठक से ठीक एक दिन पहले नरेंद्र मोदी बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मिडिल ईस्ट का संकट आने वाले समय में देश के लिए बड़ी परीक्षा बन सकता है। उन्होंने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा था कि इस चुनौती से निपटने के लिए 'टीम इंडिया' की तरह काम करना होगा।