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जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार गिनती

48 साल बाद पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार की गिनती शुरू, RBI अधिकारी भी शामिल हुए

ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार की गिनती 48 साल बाद शुरू हो गई है, मुहूर्त के हिसाब से शुरू हुआ काम, पारंपरिक वेशभूषा में मिली एंट्री


48 साल बाद पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रत्न भंडार की गिनती शुरू rbi अधिकारी भी शामिल हुए

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में करीब 48 साल बाद रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गिनती का काम बुधवार को शुभ मुहूर्त में शुरू हो गया है। दोपहर 12:09 बजे से 1:40 बजे के बीच पारंपरिक विधि-विधान के साथ मंदिर के बहुमूल्य आभूषणों की सूची (इन्वेंट्री) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सोना, चांदी और रत्नों का ब्यौरा होगा तैयार

इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के तहत मंदिर में मौजूद सोना, चांदी और कीमती रत्नों का पूरा ब्यौरा तैयार किया जा रहा है। रत्न भंडार में मौजूद संपत्ति को लेकर लंबे समय से लोगों में उत्सुकता बनी हुई थी, जो अब धीरे-धीरे सामने आएगी।

पारंपरिक वेशभूषा में मिली एंट्री

मंदिर प्रशासन के अनुसार, गिनती में शामिल सभी अधिकृत लोग पारंपरिक वेशभूषा—धोती और गमछा पहनकर ही सुबह करीब 11:30 बजे मंदिर में प्रवेश किए। इस दौरान सख्त नियमों का पालन किया जा रहा है और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति है।

नियमित रूप से होगी पूजा

प्रशासन ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मंदिर की नियमित पूजा-पाठ व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। श्रद्धालुओं को ‘बाहरा कथा’ से दर्शन की अनुमति दी गई है, जबकि ‘भीतरा कथा’ क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, सबसे पहले रोजाना पूजा में उपयोग होने वाले आभूषणों की गिनती की जा रही है। इसके बाद रत्न भंडार के बाहरी कक्ष और अंत में आंतरिक कक्ष को खोला जाएगा।

इससे पहले कब हुई गिनती

गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 1978 में 13 मई से 23 जुलाई के बीच यह गिनती हुई थी, जिसमें 128 किलो से अधिक सोना और 221 किलो से ज्यादा चांदी के आभूषण दर्ज किए गए थे। उस समय पूरी प्रक्रिया में 72 दिन लगे थे, जबकि इस बार आधुनिक तकनीक की मदद से इसे कम समय में पूरा करने की योजना है।

इस विशेष अभियान में दो जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) भी शामिल हैं, जो आभूषणों और रत्नों की पहचान में मदद कर रहे हैं। हर वस्तु की डिजिटल फोटोग्राफी की जा रही है और उन्हें अलग-अलग रंग के कपड़ों में लपेटकर सुरक्षित संदूकों में रखा जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में मंदिर के सेवायतों के साथ सरकारी बैंकों के अधिकारी और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि भी मौजूद हैं, जिससे गिनती की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 

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