भारतीय रेलवे ने ‘स्टेशन मास्टर’ पद खत्म कर नया नाम ‘स्टेशन प्रबंधक’ कर दिया। दशकों पुराना बदलाव लागू, लेकिन क्या बदलेगा यात्रियों और स्टाफ के लिए?
भारतीय रेलवे ने दशकों पुरानी पहचान को बदलते हुए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। इंडियन रेलवे के तहत अब ‘स्टेशन मास्टर’ और ‘स्टेशन सुपरिटेंडेंट’ जैसे पदनाम खत्म कर दिए गए हैं।
बता दें कि 22 अप्रैल 2026 को रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद इन पदों को ‘स्टेशन प्रबंधक’ (Station Manager) नाम दिया गया है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ नाम का बदलाव है या रेलवे की सोच में बड़ा बदलाव?
क्यों खत्म किया गया ‘स्टेशन मास्टर’ शब्द?
रेलवे कर्मचारियों के संगठन ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे। उनका तर्क था कि ‘मास्टर’ शब्द पुराना और सीमित भूमिका दर्शाता है, जबकि ‘मैनेजर’ आधुनिक जिम्मेदारियों और नेतृत्व को बेहतर तरीके से दिखाता है।
सिर्फ नाम या काम भी बदलेगा?
रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि इस फैसले से काम, जिम्मेदारी या वेतन में कोई बदलाव नहीं होगा। अधिकारियों की भूमिका वही रहेगी। ट्रेन संचालन, सुरक्षा, सिग्नलिंग और यात्रियों की सुविधा की जिम्मेदारी पहले जैसी ही होगी। बदलाव सिर्फ पद की पहचान और छवि का है।
नई पद संरचना कैसे होगी लागू?
नई व्यवस्था में ग्रेड के हिसाब से पदनाम बदले गए हैं। लेवल-7 के अधिकारियों को अब ‘सहायक स्टेशन प्रबंधक’ और लेवल-8 वालों को ‘स्टेशन प्रबंधक’ कहा जाएगा। इससे पदों में एक कॉर्पोरेट हाइरार्की जैसा ढांचा दिखेगा।
क्या यह कॉर्पोरेट मॉडल की ओर इशारा है?
रेलवे के अंदर इस फैसले को सिर्फ नाम बदलने से ज्यादा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘मैनेजर’ शब्द अपनाने से रेलवे अपनी छवि को एक आधुनिक, प्रोफेशनल और कॉर्पोरेट सिस्टम की तरह पेश करना चाहता है। जहां जवाबदेही और प्रबंधन दोनों स्पष्ट हों।
कर्मचारियों और यात्रियों पर असर क्या होगा?
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर मंडलों में इस बदलाव को तेजी से लागू किया जा रहा है। रेल कर्मचारियों का कहना है कि नए नाम से मनोबल बढ़ेगा और जनता के बीच उनकी छवि मजबूत होगी। वहीं, यात्रियों के लिए यह बदलाव ज्यादा व्यवहारिक असर नहीं डालेगा, लेकिन स्टेशन पर ‘मैनेजर’ शब्द सुनने की आदत जरूर डालनी होगी।