मई में भी गर्मी का असर कमजोर क्यों दिख रहा है? IMD के आंकड़े बता रहे हैं कि भारत की गर्मियां धीरे-धीरे बदल रही हैं। जानिए बारिश, तापमान और मौसम के पीछे का पूरा विज्ञान।
भारत में मई का महीना हमेशा से तपती गर्मी, लू और बेचैनी के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में मौसम मार्च जैसा महसूस हो रहा है। तेज धूप के बावजूद गर्म हवाओं का असर कमजोर है और कई शहरों में बारिश राहत दे रही है।
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि 2026 की गर्मियां पिछले कई दशकों के मुकाबले ज्यादा ठंडी दर्ज हो रही हैं। यही वजह है कि इस बार एसी और कूलर उतनी तेजी से नहीं चले, जितनी आमतौर पर मई की शुरुआत में चलने लगते हैं। हालांकि देशभर में मौसम एक जैसा नहीं है। पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में अब भी भीषण गर्मी पड़ रही है, लेकिन उत्तर और पूर्वी भारत का तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है। यही विरोधाभास इस साल के मौसम को अलग बना रहा है।
IMD के आंकड़ों ने बदली तस्वीर
1 मार्च से 10 मई तक भारत का औसत अधिकतम तापमान 33.08 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। IMD के 1951 से अब तक के डेटा के हिसाब से यह पिछले 75 सालों की 18वीं सबसे ठंडी गर्मी मानी जा रही है। 1981-2010 के औसत तापमान से तुलना करें तो इस साल तापमान करीब 0.51 डिग्री कम रहा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और बार-बार हो रही बारिश ने गर्मी की तीव्रता को कमजोर किया है।
मार्च ने बिगाड़ा पूरा ट्रेंड
दिलचस्प बात यह है कि मार्च की शुरुआत बेहद गर्म रही थी। 1 से 15 मार्च के बीच तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया। लेकिन इसके बाद मौसम अचानक पलट गया। 16 मार्च से 10 मई के बीच का औसत तापमान देखा जाए तो यह 1951 के बाद आठवीं सबसे ठंडी अवधि बन जाती है। यानी शुरुआती मार्च की गर्मी को हटाया जाए तो 2026 की गर्मियां रिकॉर्ड स्तर तक ठंडी मानी जातीं।
उत्तर भारत को बारिश ने दी राहत
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश और बादलों की आवाजाही ने तापमान को नीचे बनाए रखा। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 2 से 6 डिग्री तक कम रिकॉर्ड किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बारिश सीधे तौर पर गर्मी को कंट्रोल करती है। जिन क्षेत्रों में लगातार बादल और बूंदाबांदी बनी रही, वहां लू बनने की स्थिति ही नहीं बन पाई। यही कारण है कि इस बार उत्तर भारत में मई के बावजूद लोगों को अप्रैल जैसी राहत महसूस हो रही है।
दक्षिण और पश्चिम भारत अब भी तप रहा
जहां उत्तर भारत राहत महसूस कर रहा है, वहीं गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक के कई हिस्सों में गर्मी अब भी तीखी बनी हुई है। इन इलाकों में तापमान सामान्य से 1 से 4 डिग्री तक ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक अरब सागर और दक्षिणी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने से गर्म हवाओं का असर बना हुआ है। यानी पूरे देश को एक साथ ठंडा कहना सही नहीं होगा। भारत इस वक्त दो अलग-अलग मौसम पैटर्न का सामना कर रहा है।
बदलता मौसम क्या संकेत दे रहा?
मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि बीते कुछ वर्षों में भारत के प्री-मानसून पैटर्न में बदलाव तेजी से दिख रहा है। पश्चिमी विक्षोभ पहले से ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं और अप्रैल-मई में बारिश की घटनाएं बढ़ी हैं। इसका असर सीधे तापमान पर पड़ रहा है। गर्मी अब लगातार एक जैसी नहीं रह गई, बल्कि छोटे-छोटे मौसम चक्रों में टूट रही है। कभी अचानक हीटवेव आती है तो कभी तेज बारिश पूरे तापमान को गिरा देती है।
इसी वजह से अब मई का मौसम भी पहले जैसा अनुमानित नहीं रह गया। मौसम विभाग आने वाले दिनों में भी उत्तर और पूर्वी भारत में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जता रहा है।