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Hormuz Summit: India Joins Global Talks

होर्मुज संकट पर दुनिया एकजुट: ब्रिटेन की पहल, भारत समेत 35 देशों की अहम बैठक

होर्मुज संकट पर ब्रिटेन की पहल, भारत समेत 35 देश बैठक में शामिल। जानें तेल सप्लाई और वैश्विक रणनीति पर अपडेट।


होर्मुज संकट पर दुनिया एकजुट ब्रिटेन की पहल भारत समेत 35 देशों की अहम बैठक

Meet |

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग को लेकर हलचल तेज हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, ऐसे में अब इसे खोलने के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं।

क्यों बुलाई गई यह ग्लोबल बैठक?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। हालिया तनाव के बाद इस रास्ते पर आवाजाही बाधित हो गई। जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल सप्लाई प्रभावित हुई। इसी स्थिति से निपटने के लिए कीर स्टॉर्मर की अगुवाई में एक बहुपक्षीय समिट आयोजित की गई है।, जिसमें 30–35 से ज्यादा देश शामिल हैं।

भारत को मिला खास न्योता

भारत को इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने बताया कि भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिश्री वर्चुअली शामिल हुए। यह दिखाता है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

क्या है “होर्मुज समिट”?

यह एक तरह का डिप्लोमैटिक और मैरिटाइम कोऑर्डिनेशन प्लेटफॉर्म है, जहां देश मिलकर तीन बड़े मुद्दों पर रणनीति बना रहे हैं। इसमें जहाजों की निर्बाध आवाजाही बहाल करना, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, तेल-गैस सप्लाई चेन को सामान्य करना शामिल है। इस बैठक की अगुवाई ब्रिटेन की गृह सचिव  यवेट कूपर कर रही हैं।

ईरान से संपर्क में भारत

ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के बाद भारत लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, हालिया बातचीत के जरिए 6 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं। भारत की प्राथमिकता अपने जहाजों और ऊर्जा सप्लाई को सुरक्षित रखना है।

ट्रंप vs यूरोप के बीच रणनीति पर मतभेद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि NATO देशों को आगे आकर होर्मुज को खुलवाना चाहिए। वहीं, इमेनुएल मैक्रों  ने सैन्य कार्रवाई को अव्यवहारिक बताया है। मैक्रों का मानना है कि सैन्य ऑपरेशन लंबा और जोखिम भरा होगा। इससे हमलों का खतरा और बढ़ सकता है। समाधान सिर्फ बातचीत से ही संभव है। 

क्यों बढ़ी है चिंता?

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और आईआरजीसी की गतिविधियों के चलते यह संकट गहराया है। सैकड़ों जहाज इस समय प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।

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