पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया के कई देशों ने ईंधन और बिजली बचाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। भारत में भी ऊर्जा बचत पर जोर बढ़ गया है।
वैश्विक संकट के बीच ऊर्जा बचत पर दुनिया सख्त
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ईंधन संकट का असर अब दुनिया के अधिकांश देशों पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई देशों ने ऊर्जा बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भारत में भी हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईंधन की बचत करने और खर्च घटाने की देशवासियों से अपील की है। भारत ही नहीं, दुनिया के कई दूसरे देश भी संकट के दिनों में ऐसे ही उपाय करते रहे हैं। भारत के मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां कभी बहुत सख्त प्रतिबंध लागू नहीं किए गए, जितने कि दूसरे देशों ने समय-समय पर लागू किए हैं।
परिवहन और बिजली बचत पर दुनिया का फोकस
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए यूरोपीय देशों ने भी कई सख्त फैसले लिए हैं। ब्रिटेन ने ईंधन की बचत के लिए हाईवे पर गाड़ी चलाने की गति घटाकर 80 किमी प्रति घंटे कर दी है, ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। जर्मनी में ‘कार-फ्री रविवार’ जैसी पहल शुरू की गई है, जबकि फ्रांस ने छोटी दूरी की घरेलू उड़ानों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, जहां ट्रेन यात्रा के आसान विकल्प मौजूद हैं। इटली और थाईलैंड जैसे देशों ने एयर कंडीशनर के तापमान को नियंत्रित रखने और बिजली उपयोग कम करने के नियम लागू किए हैं। ब्राजील तथा फिलीपींस ने लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह दी है।
अलग-अलग तरीके से बचत कर रहे देश
दुनिया के कई देशों ने बिजली और ईंधन की खपत घटाने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाई हैं। अमेरिका के कुछ राज्यों में कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि परिवहन पर निर्भरता कम हो सके। दक्षिण कोरिया ने सप्ताहांत में बिजली उपकरणों के सीमित इस्तेमाल की सलाह दी है। वहीं पाकिस्तान में बिजली संकट को देखते हुए खेल आयोजन बिना दर्शकों के कराए गए और कार्य दिवस घटाने जैसे कदम उठाए गए।इसी तरह, श्रीलंका ने ईंधन बचत के उद्देश्य से विशेष अवकाश घोषित किया है, जबकि बांग्लादेश ने बाजारों और शॉपिंग मॉल के संचालन समय में कटौती कर दी है। कई देशों ने सजावटी रोशनी और गैर-जरूरी बिजली के उपयोग पर भी रोक लगाई है।
भारत में अभी सख्त प्रतिबंध नहीं
चीन इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इन सभी कदमों का उद्देश्य सीमित संसाधनों का संतुलित उपयोग और आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना है।भारत दुनिया का बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि अभी तक भारत में आम नागरिकों पर कोई कठोर प्रतिबंध लागू नहीं किया गया है, लेकिन सरकार लगातार ईंधन की बचत, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और आत्मनिर्भर ऊर्जा स्रोतों पर जोर दे रही है।