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रेलवे ने बढ़ाई निगरानी

सावधान! आप पर आसमान से नजर रख रहा रेलवे

रेलवे सुरक्षा बल ने चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी रोकने के लिए ड्रोन तैनात किए हैं। इससे आरोपियों की गिरफ्तारी में बढ़ोतरी हुई है और घटनाएं कम हुई हैं।


सावधान आप पर आसमान से नजर रख रहा रेलवे

चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई

चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने निगरानी के आधुनिक तरीके अपनाए हैं। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन तैनात कर निगरानी की जा रही है, जिससे ऐसे मामलों में शामिल लोगों की पहचान और गिरफ्तारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आशुतोष पांडे ने बताया कि फिलहाल संवेदनशील रेलखंडों की निगरानी के लिए दो ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इस तकनीकी निगरानी के कारण पत्थरबाजी में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी में 146 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

2026 में घटनाएं घटीं, गिरफ्तारियां बढ़ीं

आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में मई तक पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज हुई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज किए गए थे और 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।वहीं, वर्ष 2026 में इसी अवधि के दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं घटकर 144 रह गईं। इनमें 138 मामले दर्ज किए गए और 79 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे स्पष्ट है कि निगरानी व्यवस्था का असर दिखाई देने लगा है।

बच्चों के शामिल होने पर नहीं दर्ज हुए कई मामले

आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष हुई 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, क्योंकि इनमें 37 बच्चे शामिल पाए गए थे। इसी तरह इस वर्ष भी छह घटनाओं में 11 बच्चों की संलिप्तता सामने आई, जिनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

आदर्श नगर-नरेला-पानीपत सेक्शन सबसे संवेदनशील

आशुतोष पांडे ने बताया कि आदर्श नगर-नरेला-पानीपत रेलखंड पत्थरबाजी की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई ट्रेन इस सेक्शन से गुजरती है, आरपीएफ की टीम ड्रोन तैनात कर गतिविधियों पर नजर रखती है और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत जानकारी जुटाती है।

जागरूकता की कमी बड़ी वजह

आरपीएफ अधिकारियों का मानना है कि रेलवे पटरियों के आसपास रहने वाले बच्चों में शिक्षा और जागरूकता की कमी पत्थरबाजी की घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय रेलवे ट्रैक के आसपास खेलते हुए बिताते हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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