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India-Pak eminent appeal Open Letter to Modi

भारत-पाक के 100 से ज्यादा प्रमुख नागरिकों का खुला पत्र, पीएम मोदी- शहबाज से बातचीत बहाल करने की अपील

भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने पीएम नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ को खुला पत्र लिखकर बातचीत बहाल करने की अपील की है। जानिए पत्र में किन मांगों को शामिल किया गया और इसका क्या महत्व ह


भारत-पाक के 100 से ज्यादा प्रमुख नागरिकों का खुला पत्र पीएम मोदी- शहबाज से बातचीत बहाल करने की अपील

India-Pakistan Talk apeal |

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच दोनों देशों के 100 से अधिक पूर्व राजनयिकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने नई पहल की है। इन हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। इस पहल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर भी शामिल हैं।

यह खुला पत्र सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया के करोड़ों लोगों का भविष्य लगातार टकराव नहीं, बल्कि शांति, विकास और सहयोग से जुड़ा है। हस्ताक्षर करने वालों का मानना है कि संवाद बहाल करना दोनों देशों के लोगों के हित में होगा।

बातचीत बहाल करने पर सबसे ज्यादा जोर

पत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय वार्ता दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। इसमें नई दिल्ली और इस्लामाबाद में हाई कमिश्नरों की नियुक्ति, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और सामान्य वीजा सेवाएं फिर शुरू करने का सुझाव दिया गया है। पत्र में जम्मू-कश्मीर का भी उल्लेख करते हुए 2004 से 2007 के बीच बने वार्ता ढांचे पर दोबारा विचार करने की बात कही गई है।

तनाव घटाने के लिए सुझाए कई कदम

पत्र में दोनों देशों से सैन्य तनाव कम करने और चरणबद्ध तरीके से भरोसा बहाल करने की दिशा में प्रयास करने की अपील की गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि दोनों देशों की वैध सुरक्षा चिंताओं का सम्मान करते हुए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ बातचीत आगे बढ़ाई जाए। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि संवाद शुरू होने पर लंबे समय से लंबित कई विवादों के समाधान की संभावना बन सकती है।

व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की मांग

खुले पत्र में सिर्फ राजनीतिक संवाद की बात नहीं की गई, बल्कि व्यापार और आम नागरिकों के आवागमन को आसान बनाने के सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें अटारी-वाघा सीमा को व्यापार और यात्रियों के लिए फिर से पूरी तरह खोलने, श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा बहाल करने और दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र दोबारा खोलने की मांग शामिल है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि इससे यात्रा आसान होगी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर भी जोर

पत्र में करतारपुर साहिब कॉरिडोर को पूरी तरह फिर से सक्रिय करने और पाकिस्तान के नीलम वैली स्थित शारदा पीठ तक कश्मीरी पंडितों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक संपर्क विश्वास बहाली का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं और दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक माहौल तैयार करने में मदद कर सकते हैं।

दक्षिण एशिया के भविष्य का दिया हवाला

पत्र के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ से आम लोगों की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है। इसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया का भविष्य संघर्ष और अलगाव से नहीं, बल्कि शांति, साझा विकास और सहयोग से तय होना चाहिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों नेताओं से संवाद का रास्ता अपनाने और क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में ठोस पहल करने की अपील की है।

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