BRO में फर्जी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच तेज हो गई है। CBI ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 26 ठिकानों पर छापेमारी कर अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए।
सीमा सड़क संगठन (BRO) में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान के मामले में जांच ने बड़ा मोड़ लिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ 26 ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। मामले में 10 अधिकारियों समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है।
जांच रक्षा मंत्रालय की शिकायत और BRO की आंतरिक पड़ताल के बाद दर्ज चार एफआईआर पर आधारित है। एजेंसी अब वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान का आरोप
CBI के अनुसार, जांच का केंद्र कैजुअल लेबर की तैनाती और उनके नाम पर कथित फर्जी भुगतान है। एजेंसी को आशंका है कि इसी तरीके से सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपों की जांच की जा रही है।
11 राज्यों में एक साथ हुई कार्रवाई
छापेमारी जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में की गई। यह कार्रवाई विशेष रूप से लद्दाख में BRO के 'प्रोजेक्ट विजयक' और 'प्रोजेक्ट योजक' से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का हिस्सा है।
10 अधिकारी जांच के घेरे में
एफआईआर में लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर रैंक के अधिकारियों और इंजीनियरों सहित कुल 10 अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। कुछ निजी व्यक्तियों को भी जांच में शामिल किया गया है। CBI ने तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को जब्त कर उनकी तकनीकी और फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
रक्षा मंत्रालय की शिकायत के बाद दर्ज हुई FIR
मामले की शुरुआत BRO के टेक्निकल बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स की आंतरिक जांच से हुई थी। शुरुआती जांच में वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय की शिकायत पर CBI ने चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं। एजेंसी का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी और पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट की जाएगी।