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Bhojshala Verdict Today, Security Tight

भोजशाला मंदिर या मस्जिद?हाईकोर्ट में आज फैसला, धारा में धार 163 लागू , पुलिस हाई अलर्ट पर

धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज हाईकोर्ट फैसला सुना सकता है। धार और इंदौर में हाई अलर्ट, 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।


भोजशाला मंदिर या मस्जिदहाईकोर्ट में आज फैसला धारा में धार 163 लागू  पुलिस हाई अलर्ट पर

धार की ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच बड़ा फैसला सुना सकती है। इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरे जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।शुक्रवार को जुमे की नमाज और संभावित फैसले को देखते हुए भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन ने 5 जून तक पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक रूप से एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया है।

जिलेभर में सुरक्षा बढ़ाई गई

संवेदनशील हालात को देखते हुए आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। कलेक्टर राजीव रंजन मीणा0 और एसपी सचिन शर्मा लगातार हालात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने, भड़काऊ पोस्ट करने या कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

4 साल से चर्चा में है भोजशाला विवाद

भोजशाला विवाद पिछले चार वर्षों से कानूनी और धार्मिक बहस का केंद्र बना हुआ है। 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण पूजा अधिकार देने की मांग की गई थी। इसके बाद Archaeological Survey of India ने 2024 में 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया। सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद 6 अप्रैल 2026 से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।

हिंदू पक्ष ने क्या दलील दी?

हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर बताया। कोर्ट में ASI रिपोर्ट, शिलालेख, स्थापत्य संरचना और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दिया गया।याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ब्रिटिशकालीन गजेटियर और कई ऐतिहासिक अभिलेख भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हैं।

मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट पर उठाए सवाल

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने ASI सर्वे और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए।मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में कहा कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या मामले की तरह यहां कोई स्थापित मूर्ति मौजूद नहीं है।

पूरे देश की नजर फैसले पर

भोजशाला विवाद को मध्य प्रदेश के सबसे संवेदनशील धार्मिक मामलों में गिना जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला आने वाले समय में यहां की धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।प्रशासन लगातार दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की अपील कर रहा है।

 

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