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भोजशाला केस: अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई?

भोजशाला विवाद में बढ़ी कानूनी हलचल: हिंदू पक्ष की कैविएट, जैन और मुस्लिम पक्ष भी जाएंगे सुप्रीम कोर्ट?

भोजशाला को मंदिर मानने वाले हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। वहीं जैन समुदाय और मुस्लिम पक्ष भी शीर्ष अदालत जाने की तैयारी में हैं।


भोजशाला विवाद में बढ़ी कानूनी हलचल हिंदू पक्ष की कैविएट  जैन और मुस्लिम पक्ष भी जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद कानूनी हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर मानते हुए उसके प्रबंधन का अधिकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और केंद्र सरकार को सौंपने की बात कही थी। फैसले के तुरंत बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल कर दी है।

दरअसल, इस मामले को सिर्फ धार्मिक विवाद नहीं बल्कि ऐतिहासिक और संवैधानिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि अब Bhojshala Dispute राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रहे हैं।

हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दाखिल की कैविएट?

हिंदू पक्ष की ओर से जितेंद्र सिंह ‘विशेन’ ने अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है। अब समझिए, कैविएट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि अगर कोई दूसरा पक्ष हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देता है, तो अदालत बिना हिंदू पक्ष को सुने कोई आदेश पारित न करे।

हिंदू पक्ष इस फैसले को अपनी बड़ी कानूनी जीत मान रहा है और चाहता है कि भविष्य की सुनवाई में उसका पक्ष पहले सुना जाए।

जैन समुदाय भी फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं

भोजशाला विवाद में जैन समुदाय भी लंबे समय से अपना दावा रखता आया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जैन समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि वे भी मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जा सकते हैं।

जैन पक्ष का कहना है कि भोजशाला परिसर का ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध जैन परंपराओं से भी जुड़ा रहा है, इसलिए उनकी धार्मिक मान्यताओं और अधिकारों पर भी अदालत को विस्तार से विचार करना चाहिए।

फिलहाल, जैन समुदाय के कानूनी विशेषज्ञ फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही आगे की रणनीति तय की जा सकती है।

मुस्लिम पक्ष भी करेगा सुप्रीम कोर्ट का रुख

मुस्लिम पक्ष ने भी हाईकोर्ट के फैसले पर असहमति जताई है। खासकर 2003 के उस आदेश को रद्द किए जाने पर, जिसमें शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। मुस्लिम पक्ष का मानना है कि उन्हें वर्षों से धार्मिक गतिविधियों की अनुमति रही है और इस अधिकार को अचानक समाप्त करना उचित नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, मुस्लिम पक्ष जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर सकता है।

हाईकोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

इंदौर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI और केंद्र सरकार तय करेंगे। इसके अलावा अदालत ने मुस्लिम समुदाय को मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि आवंटन हेतु राज्य सरकार से संपर्क करने का विकल्प भी सुझाया है।

आगे क्या हो सकता है?

अब इस मामले की अगली बड़ी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना बढ़ गई है। फिलहाल, कानूनी जानकार मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में यह विवाद सिर्फ धार्मिक अधिकारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इतिहास, पुरातत्व और संवैधानिक अधिकारों पर भी व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।

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