इस वर्ष भारत में गेहूं की खरीद लक्ष्य से अधिक हुई है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा योजना को मजबूती प्रदान करता है।
देश में इस वर्ष गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार का असर सरकारी खरीद पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों से खरीद लक्ष्य हासिल करने में संघर्ष कर रही केंद्र सरकार ने इस बार न केवल निर्धारित लक्ष्य पूरा कर लिया है, बल्कि उससे अधिक गेहूं की खरीद भी कर चुकी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2026-27 में देश में करीब 12.06 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।
349 लाख टन गेहूं की खरीद, लक्ष्य से आगे निकली सरकार
कमोडिटी विश्लेषण संस्था आईग्रेन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 31 मई 2026 तक 349 लाख टन गेहूं की खरीद की है। जबकि संशोधित खरीद लक्ष्य 345 लाख टन निर्धारित किया गया था। पिछले वर्ष इसी अवधि तक करीब 298 लाख टन गेहूं खरीदा गया था। इस तरह सरकारी खरीद में सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
बफर स्टॉक 500 लाख टन के पार
बंपर खरीद के चलते केंद्रीय भंडार में गेहूं का स्टॉक बढ़कर 500 लाख टन से अधिक पहुंच गया है। यह 1 जुलाई के लिए निर्धारित 275 लाख टन के बफर मानक से काफी ज्यादा है। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के लिए सरकार की स्थिति मजबूत हुई है।
मध्यप्रदेश बना खरीद का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
गेहूं खरीद में सबसे अधिक वृद्धि मध्यप्रदेश में दर्ज की गई। राज्य में खरीद 34 प्रतिशत बढ़कर 104.4 लाख टन पहुंच गई, जबकि संशोधित लक्ष्य लगभग 100 लाख टन था। पिछले वर्ष प्रदेश में 77.74 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।वहीं पंजाब में सबसे अधिक 121.6 लाख टन गेहूं की खरीद हुई, जो पिछले वर्ष की 119.19 लाख टन खरीद के बराबर से अधिक है। हरियाणा में 72 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 81.2 लाख टन खरीद दर्ज की गई।