विवादों के बावजूद अयोध्या में रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धालुओं का सैलाब आ रहा है।
विवादों पर भारी पड़ी श्रद्धा, श्रीराम के दरबार में उमड़ रहे लाखों भक्त
प्रभु श्रीराम स्वरूप हैं, तो अयोध्या उनकी परछाई। बिना अयोध्या के राम की कथा कही ही नहीं जा सकती। अयोध्या में आज भी हर मंदिर, घर, गली और हर चौराहे पर 'सीता-राम, सीता-राम' की गूंज सुनाई देती है। भले ही आज अयोध्या को लेकर देशभर में दान, चंदा, चोरी, डाका, ट्रस्ट आदि की चर्चा हो रही हो, लेकिन अयोध्या आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री का मानस श्रीराम और अयोध्या को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है। अयोध्या आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए श्रीराम पुरुषोत्तम, धर्मरक्षक और लोकनायक के रूप में ही प्रतिष्ठित हैं। अयोध्या में रहने वाले आम नागरिक और देश के प्रत्येक प्रांत से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं को प्रचलित किसी 'वाद' से कोई मतलब नहीं है। वे तो श्रीराम का नाम लेकर अयोध्याजी के वैभव को निहारते हुए अपनी यात्रा को सफल और सुखद मान रहे हैं।
अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला की एक झांकी के दर्शन की ललक के साथ जिस तरह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, उससे इतना तो स्पष्ट हो चुका है कि प्रभु श्रीराम और उनकी अयोध्या का स्थान भारतीय मानस में केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि सभ्यतागत भी है।
यदि देखा जाए तो रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुए लगभग ढाई वर्ष हो चुके हैं। अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा जनवरी, 2024 में हुई थी और 2026 में इसी अवधि तक अनुमानित तौर पर यहां 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वर्तमान में भी प्रतिदिन लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। छुट्टियों या विशेष पर्व-त्योहारों के अवसर पर यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से चढ़ावे और दान में वृद्धि होना स्वाभाविक है।
वर्तमान में प्रचलित मामले में दान और उसके प्रबंधन को लेकर बड़ी चूक सामने आई है। मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों में एक कर्मचारी की संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद आंतरिक जांच शुरू की गई। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया है। साथ ही मामले में कथित रूप से लिप्त कर्मचारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
इस बीच बड़ी संख्या में श्रीरामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने बातचीत में कहा कि अयोध्या और श्रीराम मंदिर को लेकर जो भी चर्चा चल रही है, उसकी जानकारी उन्हें है। लेकिन कई शताब्दियों के लंबे संघर्ष के बाद श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ है। अभी समय वाद-विवाद का नहीं, बल्कि अयोध्या के वैभव को और अधिक बढ़ाने का है। वाद-विवाद को देखने का कार्य सरकार और प्रशासन का है तथा केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकार इस मामले में अच्छा कार्य कर रही है।
श्रीराम के लिए उनके भक्त ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं, बाकी कुछ और नहीं। गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि रामभक्त को राम से भी अधिक जानिए, क्योंकि राम ने स्वयं को ऋणी बताकर हनुमानजी को रामनाम का साहूकार बना दिया। श्रीराम, अयोध्या और श्रीरामलला मंदिर की अव्यवस्था के नाम पर अपने निजी हित साधने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अवधपुरी के शिखर पर स्थित हनुमानगढ़ी समूची अयोध्या की पहरेदारी करती है। यह इस तथ्य का भी प्रतीक है कि 'रामकाज कीन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम' कहने वाले हनुमानजी आज भी विश्राम नहीं कर रहे हैं और अयोध्या की निरंतर रक्षा कर रहे हैं।
नई दिल्ली से आए एक श्रद्धालु ने गोस्वामी तुलसीदास का यह दोहा सुनाते हुए प्रचलित प्रकरण पर विराम लगाने की अपील की
'तुलसी श्री रघुबीर तजि, करौ भरोसो और।
सुख-संपत्ति की का चली, नरकहुँ नाहीं ठौर।।'
तीर्थयात्री बोले- हमें मोदी-योगी पर भरोसा है, दोषियों को दंड मिलेगा और व्यवस्था सुधरेगी
श्रद्धालुओं की जुबानी
प्रसन्ना, तीर्थयात्री, चेन्नई
श्रीरामलला मंदिर में मिले दान के मामले की जानकारी मीडिया से मिली। लेकिन मोदी और योगी के रहते कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती। हमें तो राम और उनके नाम से मतलब है।
तिरूपति वरदराज, तीर्थयात्री, चेन्नई
श्रीरामलला का मंदिर विश्वभर के हिंदुओं की श्रद्धा का केंद्र है। ऐसे मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना को ट्रस्ट और सरकार ने बहुत गंभीरता से लिया है। आम श्रद्धालुओं को व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने चाहिए।
नेहा बुद्धिराजा, तीर्थयात्री, गुरुग्राम
जब भी कोई नई व्यवस्था खड़ी होती है, तो शुरुआती दिनों में मिले-जुले परिणाम सामने आते हैं। श्रीरामलला मंदिर की व्यवस्था में जो भी कमियां थीं, वे सामने आ गई हैं और उन्हें दूर कर लिया जाएगा।
भूपेंद्र शर्मा, तीर्थयात्री, अलीगढ़
हमें श्रीरामलला मंदिर में जो भी चल रहा है, उसकी जानकारी है। हमारा सपना था कि अयोध्या में मंदिर बने और वह बन गया। अब यह भी पता चला है कि मंदिर ट्रस्ट व्यवस्था में सुधार कर रहा है। यह स्वागतयोग्य है।
राजेश शाह, तीर्थयात्री, अहमदाबाद
श्रीराम सबके हैं और सबमें हैं। जो रामकाज में विघ्न डालेगा, उसे हनुमानजी दंड देंगे और दे भी रहे हैं। अभी अपने मन की अयोध्या को संवारने का समय है, न कि कमियां गिनाने का। जो होगा, रामजी की कृपा से होगा।
अभिषेक चौधरी, तीर्थयात्री, आगरा
इस मामले में राजनीति ज्यादा हो रही है। यदि कोई कमी सामने आई है, तो उसका समाधान किया जाना चाहिए, न कि माहौल खराब किया जाए। मुझे लगता है कि जिनके हित प्रभावित हुए हैं, उन्हें इस मामले में अवसर दिखाई दिया है।
मनीषा गोयल, तीर्थयात्री, मुंबई
श्रीरामलला मंदिर में दान में मिले धन की चोरी की घटना बहुत दुखद है। हमारी भावनाएं आहत हुई हैं, क्योंकि श्रीराम और उनका मंदिर हमारी आस्था का केंद्र हैं। ऐसे में वहां का प्रबंधन और अधिक व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। प्रथम दृष्टया यह एक बड़ी चूक है और इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी कोई गड़बड़ी सामने न आए। हम चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच हो, जिससे ट्रस्ट पर रामभक्तों का विश्वास बना रहे।