लोकसभा में नक्सलवाद पर बहस के दौरान अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। इसके चलते सियासी माहौल गरमा गया।
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद पर हुई चर्चा के दौरान सियासी माहौल गर्म हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। साथ ही कई पुराने घटनाक्रमों का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी पर क्या बोले अमित शाह
अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि राहुल गांधी अपने राजनीतिक जीवन में कई बार ऐसे लोगों और संगठनों के साथ नजर आए हैं। जिनका संबंध नक्सल विचारधारा से जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इसके रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। शाह ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसे फ्रंटल संगठनों की मौजूदगी रही। इनका नक्सल नेटवर्क से जुड़ाव बताया जाता है।
पुराने कार्यक्रमों और मुलाकातों का जिक्र
गृह मंत्री ने साल 2010 का जिक्र करते हुए कहा कि ओडिशा में राहुल गांधी ने लाडो सिकोका के साथ मंच साझा किया था। जहां कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया गया। इसके अलावा उन्होंने 2018 में हैदराबाद में गद्दार (गुम्मांडी विट्टल राव) से मुलाकात और 2025 में एक पीस कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रतिनिधियों से संपर्क का भी उल्लेख किया।
सोशल मीडिया और नारेबाजी पर सवाल
अमित शाह ने यह भी कहा कि एक नक्सली कमांडर के मारे जाने के बाद इंडिया गेट पर लगे नारे 'कितने हिडमा मारोगे' का वीडियो राहुल गांधी ने शेयर किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की गतिविधियों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
कांग्रेस पर वैचारिक हमला
शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1970 के दशक से लेकर अब तक नक्सलवाद को बढ़ावा देने में वामपंथी सोच वाली राजनीति की भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान हजारों लोगों की जान गई और इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर भी आती है।
सरकार की रणनीति और विकास का दावा
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में तेजी से विकास कार्य कराए हैं। सड़कों, बैंक शाखाओं, एटीएम, डाकघर और मोबाइल टावर जैसी सुविधाएं पहुंचाई गईं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति साफ है जो हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनसे बातचीत और पुनर्वास किया जाएगा।
बस्तर और नक्सल नेटवर्क पर टिप्पणी
शाह ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में कभी नक्सली समानांतर सरकार चलाते थे और विकास कार्यों में बाधा डालते थे। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हालात बदले हैं और क्षेत्र में विकास को गति मिली है।
हिंसा और वसूली के आरोप
गृह मंत्री ने पुराने घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सलियों ने कई बार बड़े हमले किए। इनमें जहानाबाद में सीआरपीएफ कैंप और जेल पर हमला, या झारखंड में ट्रकों को जलाना। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सल संगठनों की सालाना वसूली सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंचती थी।
आदिवासी समाज और विचारधारा पर बयान
अमित शाह ने कहा कि आजादी से पहले आदिवासी समाज अपने स्थानीय नायकों को आदर्श मानता था, लेकिन बाद में कुछ इलाकों में माओवादी विचारधारा का प्रभाव बढ़ा। उन्होंने इसका कारण कठिन भौगोलिक स्थिति और सरकारी पहुंच की कमी को बताया, जिसका फायदा उठाकर नक्सली संगठनों ने अपनी पकड़ बनाई।