एअर इंडिया की फ्लाइट गलत विमान के कारण 7 घंटे बाद दिल्ली लौट गई। 300 यात्रियों को परेशानी, कंपनी को लाखों का नुकसान हुआ।
एक बार फिर एयर इंडिया सुर्खियों में है। इस बार भी वजह ऑपरेशनल गड़बड़ी ही बनी है। दरअसल, दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को उड़ान के करीब 7 घंटे बाद बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा। इस विमान में 300 से ज्यादा यात्री मौजूद थे, जो इस पूरी घटना से हैरान रह गए।
गलत विमान, बीच रास्ते में खुला राज
दरअसल, एयर इंडिया ने इस रूट के लिए जिस विमान को भेजा था वही पूरी परेशानी की वजह बन गया। वैंकूवर जाने वाली इस फ्लाइट के लिए बोइंग 777-300ER की जगह बोइंग 777-200LR को तैनात कर दिया गया। समस्या ये थी कि 777-200LR को कनाडा में ऑपरेट करने की अनुमति ही नहीं है। यानी यह विमान वहां उतर ही नहीं सकता था।
चीन के एयरस्पेस से लेना पड़ा यू-टर्न
फ्लाइट गुरुवार सुबह 11:34 बजे दिल्ली से उड़ी थी। करीब 4 घंटे बाद कुनमिंग के एयरस्पेस में पहुंची। तभी इस गलती का पता चला। इसके बाद तुरंत फैसला लिया गया और विमान को वापस मोड़ दिया गया। आखिरकार शाम 7:19 बजे फ्लाइट फिर से दिल्ली में लैंड कर गई।
नियमों की अनदेखी या बड़ी चूक?
एविएशन नियमों के मुताबिक, हर देश अलग-अलग तरह से विदेशी एयरलाइंस को अनुमति देता है। कनाडा ने एयर इंडिया को सिर्फ 777-300ER विमान के साथ ऑपरेशन की इजाजत दी है। लेकिन इस बार 777-200LR भेज दिया गया। यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन था। माना जा रहा है कि यह गड़बड़ी शेड्यूलिंग और फ्लीट प्लानिंग में चूक के कारण हुई।
यात्रियों को झेलनी पड़ी परेशानी
हालांकि एयर इंडिया ने इसे 'ऑपरेशनल इश्यू' बताया और कहा कि सभी यात्री सुरक्षित हैं। उन्हें होटल में ठहराया गया और अगले दिन दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर भेजा गया। लेकिन सवाल यही है कि इतनी बड़ी गलती आखिर हुई कैसे, और क्यों समय रहते पकड़ी नहीं गई।
7 घंटे की उड़ान, करीब ₹60 लाख का नुकसान
इस गलती का असर सिर्फ यात्रियों पर ही नहीं, कंपनी की जेब पर भी पड़ा। जानकारी के मुताबिक, बोइंग 777 हर घंटे 8-9 टन फ्यूल खपत करता है। ऐसे में 7 घंटे की इस बेकार उड़ान में करीब 60 लाख रुपये का ईंधन खर्च हो गया।
बढ़ती उड़ानों के बीच बढ़ी जिम्मेदारी
यह पूरा मामला ऐसे वक्त सामने आया है, जब इंटरनेशनल रूट्स पर मांग बढ़ रही है और एयरलाइंस अपनी फ्लाइट्स बढ़ा रही हैं। एयर इंडिया ने हाल ही में यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के लिए अतिरिक्त उड़ानों का ऐलान भी किया है… लेकिन इस घटना ने ऑपरेशन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।