तमिलनाडु में AIADMK के भीतर बड़ा राजनीतिक विभाजन सामने आया है। सीवी षणमुगम गुट ने विजय की TVK सरकार को समर्थन देकर राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद अब विपक्षी राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। AIADMK के भीतर शुरू हुआ मतभेद खुलकर सामने आ गया है। पार्टी नेता सीवी षणमुगम ने विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। बताया जा रहा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक भी TVK के समर्थन में खड़े हैं। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं।
षणमुगम ने साफ कहा कि जनता ने विजय के चेहरे पर भरोसा जताया है और उसी जनादेश का सम्मान करते हुए उन्होंने TVK सरकार को समर्थन देने का फैसला लिया।
DMK से दूरी का संदेश
षणमुगम ने अपने बयान में DMK को लेकर भी बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि AIADMK की राजनीति हमेशा DMK के खिलाफ रही है। उनके मुताबिक पार्टी के भीतर DMK के समर्थन से सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन ज्यादातर सदस्यों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर AIADMK, DMK के साथ जाती तो पार्टी का अस्तित्व खत्म हो सकता था। इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है, क्योंकि AIADMK लंबे समय से खुद को DMK के सबसे बड़े विरोधी के रूप में पेश करती रही है।
विधानसभा में दिखी दरार
दोनों गुटों के बीच मतभेद पहली बार विधानसभा के पहले सत्र में खुलकर दिखाई दिए। नवनिर्वाचित सदस्य जब सदन पहुंचे, तभी अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई थी। 2026 चुनाव में AIADMK को सिर्फ 47 सीटें मिलीं। इसके बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर असंतोष बढ़ता गया। अब पार्टी में मुख्य रूप से एडप्पादी पलानीसामी का गुट बचा है, जिसमें करीब 17 प्रमुख नेता बताए जा रहे हैं।
विजय की बढ़ी राजनीतिक ताकत
TVK को मिला यह समर्थन विजय के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा माना जा रहा है। चुनाव के बाद पहली बार उन्हें विपक्ष के भीतर से खुला समर्थन मिला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे विधानसभा में TVK की स्थिति और मजबूत हो सकती है। साथ ही AIADMK के कमजोर होने का फायदा भी सीधे विजय को मिल सकता है।
तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से DMK और AIADMK का दबदबा रहा है। ऐसे में विजय की एंट्री पहले ही समीकरण बदल चुकी थी और अब AIADMK की टूट ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है।
पार्टी बचाने की कोशिश
षणमुगम ने यह भी कहा कि उनकी मंशा AIADMK को तोड़ने की नहीं है। उन्होंने एडप्पादी पलानीसामी को ही अपना नेता बताया। उनके मुताबिक अब सबसे जरूरी काम पार्टी को दोबारा मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका फोकस AIADMK को फिर से सक्रिय और प्रभावी बनाने पर रहेगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले महीनों में AIADMK के भीतर और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।