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SC TET Rule May Impact Teachers Jobs

TET पर सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम तय करेगा शिक्षकों का भविष्य, राहत मिलेगी या बढ़ेगा संकट?

टीईटी अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। आज होने वाली समीक्षा से तय होगा कि राहत मिलेगी या नियम और सख्त होंगे।


tet पर सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम तय करेगा शिक्षकों का भविष्य राहत मिलेगी या बढ़ेगा संकट

TET Exam |

देशभर के लाखों प्राथमिक शिक्षकों की नजर आज सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है। मामला TET अनिवार्यता से जुड़ा है, जो सीधे उनकी नौकरी से जुड़ गया है। मंगलवार को कोर्ट उन पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला कर सकता है, जिन्हें अलग-अलग राज्यों और शिक्षक संगठनों ने दायर किया है। ये याचिकाएं उस आदेश को चुनौती देती हैं, जिसमें TET पास करना अनिवार्य किया गया था।

सबसे बड़ा सवाल यही है क्या पुराने शिक्षकों को राहत मिलेगी या नौकरी पर खतरा और गहरा होगा?

पुराने शिक्षकों पर नया नियम

सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए अपने आदेश में साफ किया था कि RTE कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी TET पास करना होगा। कोर्ट ने उन्हें दो साल का समय दिया है। लेकिन तय समय में परीक्षा पास नहीं करने पर राज्य सरकारें सेवा समाप्त कर सकती हैं। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय यह शर्त नहीं थी, इसलिए अब इसे लागू करना गलत है।

कोर्ट में क्यों अहम है सुनवाई?

आज जिन पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार होगा, वह ओपन कोर्ट में नहीं बल्कि जजों के चेंबर में होगा। इस प्रक्रिया में वकीलों को सीधे दलील रखने का मौका नहीं मिलता। जज पहले तय करेंगे कि पुराने आदेश को बरकरार रखें या मामले की खुली सुनवाई करें। अगर कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार होता है, तभी शिक्षकों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।

इन राज्यों ने उठाए सवाल

इस मुद्दे पर सिर्फ शिक्षक संगठन ही नहीं, कई राज्य सरकारें भी सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, केरल जैसे राज्यों ने भी पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की हैं। कुल मिलाकर करीब 40 याचिकाएं कोर्ट के सामने हैं। इससे साफ है कि मामला सिर्फ रोजगार का नहीं, बल्कि शिक्षा नीति और राज्यों के अधिकार से भी जुड़ गया है।

नौकरी, प्रमोशन और भविष्य दांव पर

TET अनिवार्यता का असर सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है। प्रमोशन के लिए भी इस परीक्षा को जरूरी बना दिया गया है। जिन शिक्षकों की सेवा पांच साल से ज्यादा बची है, उनके लिए यह शर्त सीधे अस्तित्व का सवाल बन गई है। वहीं, कम सेवा अवधि वाले शिक्षक भी इससे अछूते नहीं हैं। अगर नियम सख्ती से लागू होता है, तो बड़ी संख्या में शिक्षकों को या तो परीक्षा पास करनी होगी या नौकरी छोड़नी पड़ सकती है।

आम शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

अगर बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित होते हैं, तो इसका असर स्कूलों की व्यवस्था पर भी पड़ेगा। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में पहले ही शिक्षकों की कमी है। ऐसे में अचानक बदलाव से पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कई संगठन इसे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक संकट भी बता रहे हैं।

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