नीट यूजी पेपर लीक मामले में सीकर के एक शिक्षक ने NTA को ईमेल भेजकर बड़ा खुलासा किया था। 150 पेज की PDF में 135 सवाल असली पेपर से मैच होने का दावा किया गया।
नीट यूजी में हुए ताजा पेपर लीक मामले में राजस्थान का सीकर अब जांच का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। इसी शहर के एक शिक्षक ने सबसे पहले NTA को ईमेल भेजकर कथित पेपर लीक की जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि शिक्षक के पास एक 150 पेज की PDF फाइल पहुंची थी, जिसे 'गेस पेपर' कहा जा रहा था। जब परीक्षा खत्म होने के बाद इसकी तुलना असली प्रश्नपत्र से की गई तो बड़ी संख्या में सवाल हूबहू मैच करते पाए गए।
यह खुलासा सामने आने के बाद NTA ने जांच एजेंसियों को अलर्ट किया और फिर राजस्थान SOG से लेकर CBI तक की एंट्री हुई। अब जांच में राजस्थान के कई कोचिंग नेटवर्क और पेपर सप्लाई चैन की जांच की जा रही है।
पुलिस ने शिकायत नहीं ली तो NTA को भेजा ईमेल
रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षक ने सबसे पहले 4 मई की रात कोटा के उद्योग नगर थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी। हालांकि पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। इसके बाद उन्होंने खुद पहल करते हुए 7 मई को NTA को ईमेल भेजा। इसी मेल में कथित पेपर लीक और गेस पेपर से जुड़े पूरे मामले की जानकारी दी गई थी। बताया गया कि उसी ईमेल के बाद NTA ने जांच एजेंसियों को सतर्क किया था।
150 पेज की PDF में 135 सवाल मैच
सीकर के एक वरिष्ठ शिक्षक ने बताया कि परीक्षा वाले दिन शाम करीब 6 बजे उन्हें इस “गेस पेपर” की जानकारी मिली थी। उन्होंने और दूसरे शिक्षक ने मिलकर 150 पेज की PDF फाइल को पढ़ा। उसी दौरान छात्र परीक्षा पर चर्चा के लिए फोन कर रहे थे, जिससे असली पेपर से सवाल मिलाने में समय लगा। जांच के दौरान सामने आया कि गेस पेपर में मौजूद 135 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे। इनमें 90 सवाल बायोलॉजी और 45 सवाल केमिस्ट्री के बताए गए। यही वह बिंदु था जहां शिक्षकों को शक हुआ कि मामला सिर्फ गेसवर्क नहीं बल्कि संगठित पेपर लीक का हो सकता है।
लाखों रुपए में बेचा गया कथित गेस पेपर
NTA को भेजे गए ईमेल में यह भी दावा किया गया था कि यह कथित गेस पेपर 30 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक में बेचा गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह PDF आखिर किन लोगों के जरिए अलग-अलग जिलों तक पहुंची। सीबीआई को पहले ही संकेत मिले हैं कि पेपर प्रिंटिंग और स्कैनिंग के बाद राजस्थान के कई शहरों में नेटवर्क के जरिए फैलाया गया था।
पत्रकारों और वकीलों से भी ली गई सलाह
सीनियर शिक्षक ने बताया कि उन्होंने पहले स्थानीय पत्रकारों से संपर्क किया ताकि मामले की गंभीरता समझी जा सके। इसके बाद दोनों शिक्षकों ने वकीलों के नंबर भी तलाशे और कानूनी सलाह लेने की कोशिश की। काफी चर्चा के बाद उन्होंने NTA, गृह मंत्रालय और CBI को ईमेल भेजने का फैसला लिया।
शिक्षकों का कहना है कि उन्हें शुरुआत में उम्मीद बहुत कम थी कि मामले में कोई कार्रवाई होगी। लेकिन बाद में जांच एजेंसियों की सक्रियता ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया।