चीन की गाओकाओ परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। जानिए आखिर इसका पेपर लीक क्यों नहीं होता, कैसे मिलिट्री कैंप, जेल प्रिंटिंग और AI ब्लॉक सिस्टम से चीन परीक्षा कराता है।
चीन की गाओकाओ परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। जानिए आखिर इसका पेपर लीक क्यों नहीं होता, कैसे मिलिट्री कैंप, जेल प्रिंटिंग और AI ब्लॉक सिस्टम से चीन परीक्षा कराता है। भारत में नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच के बीच चीन की सबसे बड़ी और दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल गाओकाओ (Gaokao) फिर चर्चा में है।
करोड़ों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाली इस परीक्षा में सुरक्षा इतनी कड़ी होती है कि पेपर लीक होना लगभग नामुमकिन माना जाता है। चीन में गाओकाओ सिर्फ एक एंट्रेंस टेस्ट नहीं, बल्कि छात्रों के करियर, सामाजिक स्थिति और भविष्य की दिशा तय करने वाली परीक्षा मानी जाती है। यही वजह है कि इसकी सुरक्षा किसी सैन्य अभियान से कम नहीं होती।
क्या है Gaokao परीक्षा?
गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन हर साल जून में किया जाता है। यह परीक्षा आमतौर पर 7 से 10 जून के बीच होती है और इसी के जरिए छात्रों को देश की टॉप यूनिवर्सिटीज में एडमिशन मिलता है। इस परीक्षा में चीनी भाषा, गणित, विदेशी भाषा और स्ट्रीम आधारित विषयों के पेपर शामिल होते हैं। हर साल करोड़ों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं।
परीक्षा के दौरान पूरे शहर की व्यवस्था बदल जाती है
गाओकाओ के दौरान चीन में सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां बेहद सख्त होती हैं। कई शहरों में ट्रैफिक तक रोक दिया जाता है ताकि छात्र समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच सकें। एग्जाम सेंटरों पर फेस रिकॉग्निशन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, मेटल डिटेक्टर, मोबाइल जैमर और AI आधारित कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। परीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पूरी तरह नजर रखी जाती है।
कैसे तैयार होता है गाओकाओ का पेपर?
गाओकाओ के प्रश्नपत्र बनाने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है। चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक परीक्षा से करीब तीन महीने पहले अनुभवी शिक्षकों और विशेषज्ञों का चयन किया जाता है। इन विशेषज्ञों को मिलिट्री कैंप जैसे दूरदराज और सुरक्षित इलाकों में रखा जाता है, जहां उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता है। इंटरनेट, मोबाइल फोन और किसी भी बाहरी कम्युनिकेशन पर प्रतिबंध रहता है।
जेलों में होती है प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग
रिपोर्ट्स के मुताबिक गाओकाओ के पेपर चीन के शिक्षा मंत्रालय और स्टेट सीक्रेट्स प्रोटेक्शन एजेंसी की निगरानी में जेल परिसरों में प्रिंट किए जाते हैं। हर प्रिंटिंग यूनिट में 24 घंटे कैमरे, सुरक्षा गार्ड और मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद रहते हैं। पेपर प्रिंटिंग से जुड़े कर्मचारियों को अलग-अलग रखा जाता है और उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।
करेंसी से भी ज्यादा होती है सुरक्षा
गाओकाओ के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा चीन में करेंसी ट्रांसपोर्ट से भी ज्यादा कड़ी मानी जाती है। पेपर को हथियारबंद सुरक्षा के बीच विशेष वाहनों में परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है। इन वाहनों में सैटेलाइट ट्रैकिंग और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे होते हैं। ड्राइवर और सुरक्षा अधिकारी पुलिस तथा मिलिट्री से जुड़े होते हैं।
परीक्षा के दौरान AI फीचर्स तक बंद कर दिए जाते हैं
चीन केवल फिजिकल सिक्योरिटी पर ही निर्भर नहीं रहता, बल्कि डिजिटल निगरानी भी बेहद सख्त होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक परीक्षा के दौरान कई AI कंपनियां अपने सवाल-जवाब वाले फीचर्स अस्थायी रूप से बंद कर देती हैं। पिछले साल ByteDance के AI प्लेटफॉर्म पर छात्रों को मैसेज मिला था कि कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम के दौरान क्वेश्चन आंसरिंग सर्विस सस्पेंड कर दी गई है।
पेपर लीक क्यों नहीं होता?
गाओकाओ में पेपर लीक न होने की सबसे बड़ी वजह उसका मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम माना जाता है।
प्रश्नपत्र बनाने वालों की पूरी निगरानी
इंटरनेट और मोबाइल पर प्रतिबंध
जेलों में प्रिंटिंग
मिलिट्री लेवल ट्रांसपोर्ट सिक्योरिटी
AI और डिजिटल सर्विस कंट्रोल
परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक निगरानी
इन सभी कारणों से पेपर लीक की संभावना बेहद कम हो जाती है।
भारत में क्यों हो रही तुलना?
भारत में नीट यूजी पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बीच अब चीन के गाओकाओ मॉडल की चर्चा तेज हो गई है। कई शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े स्तर की परीक्षाओं में टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी, एन्क्रिप्टेड पेपर सिस्टम और कड़ी जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं पर भारत को भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।