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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

शेयर बाजार में 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 2497 अंक टूटा, निफ्टी भी 776 अंक गिरा

19 मार्च 2026 को शेयर बाजार में 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई। सेंसेक्स 2497 अंक और निफ्टी 776 अंक गिरा। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई।


शेयर बाजार में 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट सेंसेक्स 2497 अंक टूटा निफ्टी भी 776 अंक गिरा

NSE BSE Update | AI pic

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 19 मार्च 2026 को भारी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले 22 महीनों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2497 अंक यानी 3.26% गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 776 अंक टूटकर 23,002 के स्तर पर आ गया।

बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

आज के कारोबार में सबसे ज्यादा बिकवाली बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में देखी गई। निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की, जिससे इन सेक्टर्स में तेज गिरावट आई। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता के चलते निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई।

गिरावट के पीछे ये बड़े कारण

विश्लेषकों के मुताबिक बाजार में गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं मध्य पूर्व में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर पड़ा। इन कारणों से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और बिकवाली बढ़ गई।

HDFC शेयर में गिरावट, चेयरमैन का इस्तीफा 

इस गिरावट के बीच HDFC बैंक के शेयर में भी करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी है। बताया जा रहा है कि उन्होंने बैंक के आंतरिक कामकाज को लेकर असहमति जताई थी। उनके इस्तीफे के बाद केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 439 लाख करोड़ रुपये से घटकर 426 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही दिन में निवेशकों की करीब 13 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। यदि जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है।

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