RBI का नया प्रस्ताव: 10,000 रुपए से ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट पर 1 घंटे का होल्ड, किल स्विच और ट्रस्टेड पर्सन फीचर से डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगेगी। डिजिटल पेमेंट की तेज गति और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी।
नई दिल्ली: देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत 10,000 रुपए से अधिक के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड लगाया जा सकता है, ताकि यूजर्स को गलत भुगतान को रोकने या कैंसिल करने का मौका मिल सके।
क्यों जरूरी माना जा रहा यह बदलाव
RBI के अनुसार, जालसाज अक्सर लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। मौजूदा सिस्टम में ज्यादातर डिजिटल पेमेंट तुरंत हो जाते हैं, जिससे यूजर्स को गलती सुधारने का समय नहीं मिलता। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल डिजिटल फ्रॉड से देश में 22,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ। खास बात यह है कि 10,000 रुपए से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल मामलों का केवल 45% हैं, लेकिन फ्रॉड वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 98.5% तक पहुंच जाती है।
क्या-क्या बदल सकता है: प्रमुख प्रस्ताव
1. 10,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड
नए नियम के तहत 10,000 रुपए से ज्यादा का ऑनलाइन पेमेंट तुरंत प्रोसेस नहीं होगा। इसमें 1 घंटे की देरी होगी, जिसके दौरान यूजर ट्रांजैक्शन को कैंसिल कर सकेगा।
2. सीनियर सिटीजंस के लिए ‘ट्रस्टेड पर्सन’ फीचर
70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। 50,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
3. ‘व्हाइटलिस्ट’ की सुविधा
यूजर अपने भरोसेमंद संपर्कों या मर्चेंट को व्हाइटलिस्ट में जोड़ सकेंगे। ऐसे मामलों में 1 घंटे का होल्ड लागू नहीं होगा, जिससे नियमित लेन-देन प्रभावित नहीं होगा।
4. ‘किल स्विच’ से तुरंत पेमेंट बंद
RBI ने ‘किल स्विच’ फीचर का भी सुझाव दिया है। इसके जरिए यूजर एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बंद कर सकेगा, खासकर तब जब अकाउंट हैक होने की आशंका हो।
अभी और बाद में क्या फर्क होगा
| सुविधा |
अभी क्या है |
प्रस्ताव के बाद |
| 10,000+ पेमेंट |
तुरंत ट्रांसफर |
1 घंटे का होल्ड |
| सीनियर सिटीजंस |
कोई विशेष नियम नहीं |
50,000+ पर ट्रस्टेड पर्सन की मंजूरी |
| फ्रॉड स्थिति |
कस्टमर केयर पर निर्भर |
‘किल स्विच’ से तुरंत नियंत्रण |
लागू होने में कितना समय लगेगा
RBI फिलहाल बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ इस प्रस्ताव के तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहा है। चुनौती यह है कि डिजिटल पेमेंट की तेज गति और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का सिस्टम लागू होने से शुरुआती असुविधा हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह डिजिटल लेन-देन को ज्यादा सुरक्षित बनाएगा। RBI ने इस प्रस्ताव पर 8 मई तक आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।