1 अप्रैल 2026 से न्यू लेबर कोड के लागू होने की चर्चा तेज है। इससे सैलरी स्ट्रक्चर, PF, ग्रेच्युटी और काम के घंटों में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
नई दिल्ली। 1 अप्रैल 2026 से नौकरीपेशा लोगों के लिए कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। देश की कई कंपनियां नए लेबर कोड लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। इससे सैलरी स्ट्रक्चर, पीएफ और अन्य सुविधाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
चार नए लेबर कोड होंगे प्रभावी
केंद्र सरकार पहले ही 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह 4 नए लेबर कोड ला चुकी है। इनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़े नियम शामिल हैं। सरकार ने इन्हें 21 नवंबर 2025 को नोटिफाई किया था।
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
नए नियमों के तहत बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50% रखना होगा। अभी कई कंपनियां भत्तों को ज्यादा रखकर बेसिक सैलरी कम रखती हैं। इस बदलाव से PF योगदान बढ़ेगा और टेक-होम सैलरी घट सकती है।
PF बढ़ेगा तो इनहैंड सैलरी पर असर
बेसिक सैलरी बढ़ने का सीधा असर PF कटौती पर पड़ेगा। कर्मचारी और कंपनी दोनों का PF योगदान बढ़ जाएगा। इससे कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है।
ग्रेच्युटी के नियम में राहत
नए लेबर कोड के तहत ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव प्रस्तावित है। अब 5 साल की बजाय 1 साल की नौकरी के बाद भी ग्रेच्युटी मिल सकती है। यह सुविधा फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को भी मिलेगी।
समय पर सैलरी और नियुक्ति पत्र अनिवार्य
नए नियमों के तहत हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा। समय पर वेतन भुगतान कानूनन अनिवार्य किया गया है। देशभर में न्यूनतम वेतन लागू करने की भी व्यवस्था की गई है।
काम के घंटे और ओवरटाइम
सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम का प्रावधान रखा गया है। दैनिक वेतन की गणना 8 घंटे के कार्यदिवस के आधार पर होगी। ओवरटाइम कराने पर दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा।
महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए प्रावधान
नए कानून में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम की अनुमति दी गई है। हालांकि इसके लिए उनकी सहमति और सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे। साथ ही ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी समान अधिकार देने का प्रावधान है।
गिग वर्कर्स को पहली बार पहचान
नए लेबर कोड के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी पहचान मिलेगी। उन्हें सामाजिक सुरक्षा जैसे PF, बीमा और पेंशन का लाभ मिल सकेगा। एग्रीगेटर कंपनियों को इसके लिए तय योगदान देना होगा।