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मॉनसून की कमज़ोरी से महंगाई

कमज़ोर मॉनसून से बिगड़ेगा रसोई बजट : दूध, दाल, सब्जियां होंगी महंगी

भारत में मॉनसून की धीमी गति से खाद्य पदार्थों के दाम में वृद्धि की आशंका है। दूध, दाल और सब्जियां सहित कई उत्पादों के महंगे होने की संभावना है।


कमज़ोर मॉनसून से बिगड़ेगा रसोई बजट  दूध दाल सब्जियां होंगी महंगी 

देश के कई हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार अब भी धीमी है और मौसम विभाग के अनुमान ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस बार मॉनसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर घर के रसोई बजट पर भी पड़ेगा। जुलाई और अगस्त में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई कितनी बढ़ेगी।

90 प्रतिशत बारिश का अनुमान, बढ़ी चिंता

मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच सामान्य का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान जताया है। यदि लंबे समय तक बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकार और कृषि विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

दूध और डेयरी उत्पाद हो सकते हैं महंगे

कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर पशुओं के चारे पर पड़ सकता है। हरे चारे की कमी से पशुपालकों की लागत बढ़ेगी, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई के दौरान दूध की कीमतों में 3 से 4 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर दही, पनीर, घी और मक्खन जैसे डेयरी उत्पादों पर भी देखने को मिलेगा।

दाल और खाद्य तेल की कीमतों पर भी दबाव

कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई पर भी पड़ सकता है। अरहर, उड़द और अन्य दालों की खेती मॉनसून पर काफी निर्भर करती है। यदि उत्पादन घटता है तो देश को दालों का आयात बढ़ाना पड़ सकता है। ऐसे में दालों के साथ-साथ सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों के प्रभावित होने से खाद्य तेल भी महंगे हो सकते हैं।

सब्जियां भी कर सकती हैं जेब ढीली

बारिश कम होने पर टमाटर, हरी सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाली फसलों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर स्थानीय मंडियों और खुदरा बाजार में दिखाई देगा, जहां सब्जियों की कीमतों में तेजी आ सकती है।

खरीफ फसलों पर बढ़ेगा असर

मक्का सहित कई खरीफ फसलों का उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि फिलहाल गेहूं और चावल जैसी प्रमुख फसलों पर बड़ा असर नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इनके लिए सिंचाई व्यवस्था और सरकारी भंडार उपलब्ध हैं। फिर भी यदि मॉनसून लंबे समय तक कमजोर रहता है तो खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

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