डीमैट में पड़े शेयर बेचने की जरूरत नहीं, अब उन्हीं पर लोन मिल सकता है। लेकिन LTV, मार्जिन कॉल और जोखिम को समझे बिना फैसला नुकसानदेह हो सकता है।
ज्ञानेश पाठक
सुनने में यह काफी आसान और स्मार्ट लगता है, लेकिन इसके अंदर कुछ ऐसे नियम और जोखिम छिपे होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है. नहीं तो यही सुविधा आगे चलकर परेशानी भी बन सकती है. आज जानेंगे, शेयर्स पर लोन लेते कैसे हैं।
एलएएस क्या है
यह पूरी तरह कानूनी है। इसे सुरक्षित ऋण ही माना जाता है. आप अपने डीमैट अकाउंट में पड़े शेयर (बैंक या एनबीएफसी) के पास प्लेज यानी गिरवी रखते हैं और उसके बदले आपको एक क्रेडिट लिमिट मिलती है. यह एक सामान्य लोन की तरह ही काम करता है. बस इसमें ईएमआई वाला सिस्टम नहीं होता. इसमें आपको ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलती है. ओवरड्राफ्ट मतलब, आपको एक लिमिट मिल जाती है, लेकिन आप जितना पैसा निकालते हैं, ब्याज सिर्फ उसी पर लगता है, पूरी लिमिट पर नहीं।
कितना लोन मिल सकता है?
इसके लिए आपको समझना होगा एलटीवी यानी लोन टू वैल्यू रेश्यो. मतलब आपके शेयर की कीमत का कितना प्रतिशत आपको लोन के रूप में मिलेगा। आरबीआई के नियम के अनुसार, एलएएस में अधिकतम एलटीवी 50 प्रतिशत तक हो सकता है. मतलब अगर आपके शेयर की वैल्यू 10 लाख है, तो आपको अधिकतम 5 लाख तक ऋण मिल सकता है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखने लायक है।
हर शेयर पर एलटीवी एक जैसा नहीं होता
लार्ज कैप स्टॉक्स पर 45-50 प्रतिशत तक होता है मिड और स्मॉल कैप पर 30 फीसदी या उससे भी कम हो सकता है। क्योंकि छोटे शेयरों में ज्यादा उतार चढ़ाव होता है। इसलिए लोन देने वाला ज्यादा रिस्क नहीं लेता.
सबसे बड़ा रिस्क
मान लेते हैं आज शेयर की कीमत 8 लाख है कल गिर गई तो? मान लीजिए आपने 8 लाख के शेयर पर 4 लाख का लोन लिया है. लेकिन अगर शेयर की कीमत गिरकर 7 लाख रह गई तो आपका एलटीवी बढ़कर 57 फीसदी हो जाएगा। अब लोन देने वाला आपको बोलेगा कि या तो 50,000 लोन वापस करो या 1 लाख के और शेयर गिरवी रखो. बता दें कि ये प्रोसेस हर रोज किया जाता है. यानी बाजार में गिरावट आई तो आपको बार-बार मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ सकता है।
क्या आपके शेयर बिक भी सकते हैं?
हां, बिल्कुल बिक सकते हैं. अगर आपने समय पर एलटीवी ठीक नहीं किया, तो उधारकर्ताआपके शेयर बेच सकता है. एक उदाहरण से समझिए आपके पास 4 लाख का लोन है, शेयर गिरकर 7 लाख हो गए, अब 50,000 का अंतर बन गया. आपने 7 दिन में इसे ठीक नहीं किया, तो उधारकर्ता को अधिकार है कि वह 50,000 के शेयर बेच दें। अगर एलटीवी 60 अगर प्रतिशत या उससे ऊपर चला गया, तो कई मामलों में लेंडर तुरंत शेयर्स बेच सकता है।
ब्याज कैसे लगता है
इसमें ईएमआई तो होती नहीं. आपको हर महीने सिर्फ ब्याज देना होता है. अगर आपने 4 लाख का लोन लिया और ब्याज दर 10 प्रतिशत है, तो लगभग 3,400 प्रति महीने ब्याज देना पड़ेगा, जैसे ही आप मूल धन चुका देते हैं, शेयर छूट जाते हैं।
ऐसे लोन लेना सही होता है?
आमतौर पर विशेषज्ञ बताते हैं कि कम समय के लिए लिए लोन चाहिए तो ठीक है, जैसे कुछ महीनों के लिए, तो ठीक है. लेकिन अगर आप इसे लंबे समय के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं। डीमेट में पड़े शेयर बेचने की जरूरत नहीं, अब उन्हीं पर मिल सकता है लोन. लेकिन यह सुविधा जितनी आसान दिखती है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है। एलटीवी, मार्जिन कॉल और जबरन शेयर बिकने जैसे खतरे समझे बिना कदम उठाया तो नुकसान तय है। अगर आपके पास अच्छा खासा स्टॉक पोर्टफोलियो है और अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए, तो ज्यादातर लोग शेयर बेचने के बारे में सोचते हैं. लेकिन एक और तरीका होता है जिससे आपको शेयर भी ना बेचना पड़े और आपको पैसे भी मिल जाए। मतलब आपके पास पड़े शेयर्स पर आपको लोन भी मिलता है। इसे एलएएस यानी लोन अगेन्स्ट शेयर्स कहते हैं। इसके तहत आप अपने शेयर गिरवी रखकर लोन ले सकते हैं, बिना उन्हें बेचे ।