भारत में मानसून की कमजोर शुरुआत के कारण खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई, जिससे खाद्य महंगाई में तेजी आने की संभावना है।
देश में मानसून की कमजोर शुरुआत का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई है, जिससे चावल, दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश की कमी बनी रही तो आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है।
आईएमडी का अनुमान: सामान्य से कम बारिश
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस वर्ष दीर्घावधि औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया है। जून महीने में देशभर में करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे धान, दाल, तिलहन और मोटे अनाज जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हुई।हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में कुछ राज्यों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।
44% जिलों में अब भी बारिश की कमी
आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार देश के 738 जिलों में से 44 प्रतिशत से अधिक जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें से लगभग 10 प्रतिशत जिलों में बारिश की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।विशेषज्ञों के मुताबिक महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सिंचाई की सीमित व्यवस्था होने के कारण फसलों पर सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है।
धान की बुआई घटी, चावल महंगा होने के आसार
कम बारिश का सबसे बड़ा असर धान की खेती पर पड़ा है। 10 जुलाई तक धान की बुआई पिछले साल की तुलना में 8.63 प्रतिशत कम दर्ज की गई है।इसी वजह से जून में चावल की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 1.72 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि मई में यह केवल 0.23 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन घटने की स्थिति में आने वाले महीनों में चावल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
अरहर, उड़द और मूंग की कीमतों में भी तेजी
खरीफ की प्रमुख दालों की बुआई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
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अरहर (तूर) की बुआई में 30.29% की कमी
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उड़द की बुआई में 29.71% की कमी
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मूंग की बुआई में 10.62% की कमी
इसका असर बाजार में भी दिखने लगा है। जून में अरहर, उड़द और मूंग की खुदरा कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। यदि बुआई की स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले महीनों में दालें और महंगी हो सकती हैं।
खाद्य तेलों पर भी बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
तिलहन फसलों की बुआई में भी 21.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जून में तिलहन की महंगाई दर बढ़कर 5.42 प्रतिशत पहुंच गई, जो मई में 4.9 प्रतिशत थी।इसका असर सरसों, सोयाबीन और सूरजमुखी से बनने वाले खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ सकता है।
मोटे अनाज भी हो रहे महंगे
ज्वार और रागी जैसे मोटे अनाज, जिन्हें कम बारिश वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक फसल माना जाता है, उनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे खाद्य महंगाई का दायरा और बढ़ने की आशंका है।
आम आदमी की थाली पर बढ़ेगा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून जल्द सामान्य नहीं हुआ तो इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ेगा। चावल, दाल और खाद्य तेल महंगे होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई सरकार और आम उपभोक्ताओं, दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।