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Iran-Israel War Hits Onion Prices in India

मिडिल ईस्ट जंग का भारत की प्याज पर असर: होटलों में घटी मांग से प्याज के भाव धड़ाम

ईरान-इजराइल युद्ध का असर भारत की प्याज मंडियों पर दिखा। कर्नाटक में दाम 6-12 रुपये प्रति किलो तक गिरे, किसानों को भारी नुकसान।


मिडिल ईस्ट जंग का भारत की प्याज पर असर होटलों में घटी मांग से प्याज के भाव धड़ाम

ईरान-इजराइल लड़ाई का असर अब भारत की मंडियों में भी दिखाई देने लगा है। कर्नाटक में प्याज के दाम भारी गिरावट के साथ 6 से 12 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं, जिससे किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है। प्याज के निर्यात में आई कमी और घरेलू खपत घटने से बाजार में मांग कमजोर पड़ी है। होटलों के बंद होने से प्याज की मांग गिर गई है, जिसका असर भाव पर साफ दिखाई दे रहा है।

कर्नाटक में दाम 6-12 रुपये प्रति किलो

कर्नाटक प्याज उत्पादन का बड़ा केंद्र है, लेकिन इस समय कई जिलों में किसानों को अपनी उपज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा। स्थानीय बाजारों में अच्छी गुणवत्ता का प्याज 10-12 रुपये प्रति किलो और छोटी या कम गुणवत्ता की उपज 6-8 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। किसानों का कहना है कि इन दरों पर वे हार्वेस्टिंग, पैकिंग और परिवहन का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं।वहीं, युद्ध का असर महाराष्ट्र की नासिक मंडी में भी देखा जा रहा है। यहां का प्याज खाड़ी और मध्य पूर्व के कई देशों में निर्यात होता है। जब से लड़ाई शुरू हुई है, तब से दुबई जाने वाले कई कंटेनर फंस गए हैं। यहां तक कि कई कंटेनरों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा है।

नासिक की तुलना में आधी कीमत

कोप्पल, बल्लारी, विजयपुरा और होसपेटे जिलों में भी किसानों की स्थिति इसी तरह बनी हुई है। स्थानीय किसानों ने नासिक की उपज की तुलना में अपने प्याज के कम दाम मिलने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नासिक की तुलना में उन्हें लगभग आधी कीमत मिलती है.स्थिति में सुधार के कोई संकेत न देखते हुए किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद जैसे तत्काल कदम उठाने की मांग की है, ताकि उन्हें भारी नुकसान से बचाया जा सके।

एलपीजी संकट से प्याज की मांग घटी

व्यापारियों का मानना है कि ईरान-इजराइल युद्ध के चलते एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके कारण होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर असर पड़ा है। एलपीजी की कमी और ब्लैक मार्केट में ऊंची कीमतों के कारण कई होटल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं, जिससे प्याज की खपत तेजी से कम हुई है। इसका सीधा प्रभाव प्याज की बिक्री और कीमतों पर पड़ा है। इसके साथ ही प्याज रखने के लिए उपयोग होने वाली गनी बैग (बोरी) के दाम भी बढ़कर 18-20 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गए हैं। मंडियों में किसान बताते हैं कि कम भावों के कारण वे न तो प्याज बेच पा रहे हैं और न ही महंगी बोरियां खरीद पा रहे हैं। प्याज के कई ऑर्डर भी रद्द हो गए हैं, जिससे व्यापारियों और किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। लड़ाई रुकने तक इसमें किसी तरह के सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है।