भारतीय प्रधानमंत्री 43 साल बाद कोई नॉर्वे जाऐंगे। पीएम मोदी की यात्रा से भारत-नॉर्वे ऊर्जा साझेदारी, LPG सप्लाई और समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते नॉर्वे की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे हैं। खास बात यह है कि 43 साल में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री ओस्लो पहुंचेगा। इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, एलपीजी सप्लाई, ग्रीन एनर्जी और समुद्री सहयोग जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत को LPG निर्यात करने वाली नॉर्वे की दिग्गज ऊर्जा कंपनी इक्विनोर ने भारत के साथ लंबे समय तक चलने वाला भरोसेमंद कॉन्ट्रैक्ट करने की इच्छा जताई है। ऐसे समय में यह दौरा अहम माना जा रहा है। जब भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने पर फोकस कर रहा है।
भारत को LPG भेज रही नॉर्वे की बड़ी कंपनी
नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर के मुताबिक, नॉर्वे की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी इक्विनोर पहले से भारत को LPG एक्सपोर्ट कर रही है। अब कंपनी भारत के साथ दीर्घकालिक और स्थिर समझौते चाहती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो भारत को एलपीजी सप्लाई में स्थिरता मिल सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी कुछ हद तक कम हो सकता है।
पीएम मोदी की यात्रा क्यों मानी जा रही खास?
प्रधानमंत्री मोदी 18 मई को नॉर्वे में द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इसके बाद 19 मई को ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ का आयोजन होगा। ओस्लो सिटी हॉल में मुख्य बैठक रखी गई है। वहीं नॉर्वे के शाही परिवार की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्वागत भी किया जाएगा। यह यात्रा भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
ग्रीन एनर्जी और समुद्री सेक्टर पर रहेगा फोकस
नॉर्वे की करीब 70% कंपनियां भारत में समुद्री क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में काम कर रही हैं। इनमें ग्रीन टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और पर्यावरण अनुकूल शिपिंग पर ज्यादा जोर है। दोनों देशों के बीच जिन सेक्टर्स में सहयोग बढ़ रहा है, उनमें शामिल हैं:
डीप ऑफ-शोर प्रोजेक्ट
LNG बेस्ड शिपिंग
कोस्टल शिपिंग
इनलैंड वॉटरवेज
हाइड्रो-इलेक्ट्रिसिटी
आईटी और बायोटेक्नोलॉजी
पोर्ट डेवलपमेंट और टिकाऊ शिपिंग
भारत के बढ़ते समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित ऊर्जा मिशन को देखते हुए नॉर्वे की कंपनियां यहां निवेश बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रही हैं।
भारत-EFTA समझौते पर भी रहेगी नजर
इस दौरे में भारत-EFTA व्यापार समझौते को भी अहम माना जा रहा है। नॉर्वे समेत नॉर्डिक देश भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं। राजदूत स्टेनर ने कहा कि पिछले चार वर्षों में वैश्विक मंच पर भारत का महत्व तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि नॉर्डिक देश भारत के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं।
भारत-नॉर्वे रिश्तों में क्यों आ रही तेजी?
भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और निवेश में बढ़ोतरी देखी गई है। नॉर्वे की कई आईटी कंपनियां भारत में ऑफशोर ऑपरेशन शुरू करने और भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। वहीं समुद्री और शिपिंग उद्योग में दोनों देशों की साझेदारी तेजी से आगे बढ़ रही है।