बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हाल ही में हुई बर्बर और लक्षित हिंसा की घटनाएं अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय हैं। शरियतपुर जिले में साल के अंतिम दिन 50 वर्षीय खोकोन दास को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले 12 दिनों में तीन हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र की हत्या के बाद 24 दिसंबर को भीड़ ने एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह घटना राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में हुई। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई।
इन घटनाओं के चलते इलाके में तनाव का माहौल है और लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ये हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब बांग्लादेश में आए दिन अराजकता की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर हिंदू समाज को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी गहरी साजिश के तहत हिंदुओं पर हमले किए जा रहे हों।
शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार प्रशासनिक दक्षता में लगातार विफल दिख रही है। हालांकि, सरकार का दावा है कि इन घटनाओं को सांप्रदायिकता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि इन लक्षित हमलों के पीछे व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं।
फिर भी, जिस तरह अल्पसंख्यकों को एक-एक करके निशाना बनाया जा रहा है, उससे स्पष्ट है कि बांग्लादेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। हैरानी की बात यह है कि इन हमलों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चुप्पी साधे बैठा है। हमलों में निर्दोष लोगों की हत्याएं, मंदिरों और संपत्तियों को निशाना बनाना और जबरन विस्थापन शामिल हैं। यह न केवल मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि बांग्लादेश के संवैधानिक मूल्यों पर भी सीधे हमला के रूप में देखा जा सकता है।
यह आवश्यक है कि सभी नागरिक, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य, सुरक्षित महसूस करें और बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें। किसी भी समुदाय के विरुद्ध लक्षित हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं अस्वीकार्य हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन करती हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संबंधित सरकारों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसी घटनाओं की निंदा करें, दोषियों को जवाबदेह ठहराएं और प्रभावित समुदायों को सुरक्षा एवं समर्थन सुनिश्चित करें।
मानवाधिकारों का सम्मान और सभी समुदायों के लिए समान व्यवहार किसी भी स्वस्थ समाज की नींव है। बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय परिवेश में आर्थिक हितों को देखते हुए संबंधों को सुदृढ़ किया जाता है। एक अच्छा पड़ोसी होने के नाते, बांग्लादेश की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह भारत के साथ संबंधों को मजबूती प्रदान करे।
पूर्वोत्तर राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठ किसी से छिपी नहीं है। जत्थों में आए दिन घुसपैठ की घटनाएं होती हैं। यह बांग्लादेश में कानून व्यवस्था के चरमराने का स्पष्ट द्योतक है। यही कारण है कि वहां हिंसक गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। इन घटनाओं का असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ रहा है।
ऐसे में भारत को चाहिए कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास तेज करे और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने के लिए दबाव बनाए।