जबलपुर में जहां आख़िरी सांस तक मिलती है गरिमा, वही है विराट हॉस्पिस

Update: 2026-02-10 04:53 GMT

जबलपुर के गोपालपुर लम्हेटाघाट में स्थित ‘विराट हॉस्पिस’ अंतिम चरण के कैंसर रोगियों की देखभाल के लिए मानवीय संवेदना का प्रत्यक्ष स्वरूप है। इस संस्थान की स्थापना के पीछे एक सच्ची घटना है, जिसने साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी को 28 बिस्तरों वाले विराट हॉस्पिस, यानी एक देखभाल केंद्र, के निर्माण के लिए प्रेरित किया।यहां अंतिम चरण के कैंसर रोगियों को निःशुल्क रहने, खाने और चिकित्सा देखभाल की सुविधा दी जाती है। रोगी के साथ उनका एक परिजन भी संस्थान में रह सकता है, जिसके लिए रहना और भोजन पूरी तरह निःशुल्क होता है।

जब तक जीवन चलता है, तब तक भावनाएं भी हैं : साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी

चेयरपर्सन साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि अक्सर चिकित्सक परिजनों से कह देते हैं कि अब मरीज को घर ले जाइए, यहां हम कुछ नहीं कर सकते। ऐसे रोगियों को विराट हॉस्पिस में रखकर भावनात्मक वातावरण में उनकी सेवा-सुश्रुषा और उपचार किया जाता है।उन्होंने बताया कि हॉस्पिस का अर्थ ऐसा संस्थान है, जहां अंतिम चरण की गंभीर बीमारी से जूझ रहे रोगियों की विशेष देखभाल की जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक जीवन चलता है, तब तक भावनाएं भी होती हैं। इसी सोच के साथ ऐसे कैंसर रोगियों की सेवा की जाती है, जिनकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं होता या जिनके परिजन चाहकर भी उनकी सेवा नहीं कर पाते।

एक घटना से जन्मा विराट हॉस्पिस का विचार

साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि वर्तमान में देश में केवल 9 हॉस्पिस ही कार्यरत हैं। विराट हॉस्पिस शुरू करने का विचार उन्हें उनके आश्रम में रह रही एक जनजातीय युवती की कैंसर से मृत्यु के बाद आया।उन्होंने बताया कि आश्रम में रहने वाली उस जनजातीय युवती को कैंसर हो गया था। कैंसर होने के बाद वह लगभग तीन वर्ष तक जीवित रही। अंतिम चरण में जब चिकित्सकों ने कह दिया कि अब कुछ नहीं किया जा सकता और मरीज को ले जाया जाए, तब उसे वापस आश्रम लाया गया। चूंकि उस युवती का कोई परिजन नहीं था, इसलिए आश्रम में उसकी पूरी सेवा की गई, लेकिन अंततः उसकी मृत्यु हो गई।इस घटना ने उनके मन में यह विचार पैदा किया कि कोई ऐसा संस्थान होना चाहिए, जहां ऐसे मरीजों को सम्मान और संवेदना के साथ अंतिम समय तक रखा जा सके।

यूनाइटेड किंगडम से लिया हॉस्पिस मॉडल का विचार

इसी सोच के साथ उन्होंने यूनाइटेड किंगडम में प्रचलित हॉस्पिस कॉन्सेप्ट के बारे में जाना और उसे समझा। इसके बाद एक किराए के ड्यूप्लेक्स में विराट हॉस्पिस की शुरुआत की गई।उन्होंने बताया कि शुरुआत में भवन किराए पर लेने में काफी कठिनाई आई, क्योंकि लोगों को लगता था कि कैंसर रोगी रहने से अधिक मौतें होंगी। इसी डर के कारण भवन किराए पर नहीं दिए जाते थे। बावजूद इसके, किराए के ड्यूप्लेक्स में चार वर्षों तक विराट हॉस्पिस का संचालन किया गया।इसके बाद गोपालपुर लम्हेटाघाट में नया भवन बनाया गया, जहां वर्तमान में 28 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। मरीजों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ 24 घंटे तैनात रहता है। संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अखिलेश गुमास्ता भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

जल्द आरंभ होगा निःशुल्क कैंसर अस्पताल

साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने बताया कि विराट हॉस्पिस के समीप ही अप्रैल माह में एक निःशुल्क कैंसर अस्पताल का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद हॉस्पिस और अस्पताल को मिलाकर कुल 100 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इस अस्पताल में कैंसर रोगियों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा।इसके अलावा साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी के मार्गदर्शन में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक का एक विद्यालय भी संचालित किया जा रहा है, जिसका संचालन मैत्रेयी दीदी द्वारा किया जाता है।

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