MP में अफसरों की कमी का असर, बड़े मंत्रियों के विभाग ‘छोटे’ अधिकारियों के हवाले

Update: 2026-01-20 04:51 GMT

 भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक ढांचे की तस्वीर इन दिनों कुछ अलग नजर आ रही है। बड़े-बड़े मंत्रालय, लेकिन उन्हें संभाल रहे हैं सचिव स्तर के अधिकारी। वजह साफ है सरकार ने 10 अहम विभागों की कमान सचिवों को सौंप दी है और वो भी स्वतंत्र प्रभार में । खास बात यह है कि इन विभागों के मंत्री कोई छोटे नाम नहीं हैं। मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री तक के मंत्रालय इस व्यवस्था में शामिल हैं

तबादला सूची में भी दिखा असर

रविवार को जारी 26 अधिकारियों की तबादला सूची ने इस तस्वीर को और साफ कर दिया। इस सूची में सचिव स्तर के चार अधिकारियों स्वतंत्र कुमार सिंह, इलिया राजा, जॉन किंग्सले, आलोक कुमार और श्रीमन शुक्ला को सीधे विभाग सौंपे गए हैं, इसके पहले से ही संजय गोयल, निशांत बड़बड़े, मनीष सिंह, रघुराज राजेन्द्र और जीवी रश्मि जैसे अधिकारी स्वतंत्र रूप से बड़े विभाग देख रहे हैं। यानी कुल मिलाकर 10 विभाग ऐसे हैं, जो सचिव स्तर के भरोसे चल रहे हैं । सरकार का तर्क है कि सचिव स्तर के अधिकारी भी कामकाज को बेहतर ढंग से संभाल रहे हैं। यही वजह रही कि जिन विभागों का अतिरिक्त प्रभार अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव के पास था, उन्हें वापस लेकर सीधे सचिवों को सौंप दिया गया

 प्रशासन में नवाचार या मजबूरी?

मध्यप्रदेश सरकार के पास कुल 56 विभाग हैं, जबकि मुख्य सचिव समेत अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की संख्या 50 है। इनमें से भी 17 अधिकारी इस समय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं । वर्तमान स्थिति यह है कि शासन स्तर पर 12 अपर मुख्य सचिव और 15 प्रमुख सचिव पदस्थ हैं। इनमें से 3 अपर मुख्य सचिव और एक प्रमुख सचिव मंत्रालय के बाहर तैनात हैं, मुख्य सचिव के पास वैसे भी कोई विभाग नहीं होता । ऐसे में मंत्रालय में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या विभागों की संख्या से आधी से भी कम रह जाती है। नतीजा यह कि कई अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों को एक के बजाय दो-दो विभागों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है

इन सचिवों के पास हैं बड़े विभाग

मुख्यमंत्री के खनिज और जेल विभाग की जिम्मेदारी आलोक सिंह और मनीष सिंह को सौंपी गई है। आलोक सिंह मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव भी हैं। मनीष सिंह के पास मंत्री उदय प्रताप सिंह का परिवहन विभाग भी है, उदय प्रताप सिंह के शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संजय गोयल संभाल रहे हैं।  उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के योजना एवं सांख्यिकी विभाग की कमान श्रीमन शुक्ला के पास है। प्रहलाद पटेल का श्रम मंत्रालय रघुराज राजेन्द्र देख रहे हैं  कृषि मंत्री एंदल सिंह के विभाग की जिम्मेदारी निशांत बड़बड़े को दी गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के विभाग की सचिव जीवी रश्मि हैं। नारायण सिंह का उद्यानिकी विभाग जॉन किंग्सले संभाल रहे हैं पर्यटन मंत्री धर्मेन्द्र लोधी का विभाग इलिया राजा के पास है, जबकि नारायण सिंह पंवार के मछुआ कल्याण विभाग की जिम्मेदारी स्वतंत्र कुमार सिंह को सौंपी गई है ।

स्वतंत्र प्रभार में चल रहे मंत्रालय

सबसे अहम बात यह है कि ये सभी सचिव किसी वरिष्ठ अधिकारी के अधीन नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से विभाग चला रहे हैं, यानी फाइल से लेकर फैसले तक की जिम्मेदारी सीधे इन्हीं पर है. प्रशासनिक हलकों में सरकार के इस कदम को कोई मजबूरी बता रहा है. तो कोई इसे प्रशासनिक नवाचार मान रहा है। फिलहाल इतना तय है कि मध्यप्रदेश में शासन अब सचिवों के भरोसे बड़े-बड़े मंत्रालय चला रहा है और यही व्यवस्था आगे कितनी टिकाऊ होगी, यह आने वाला वक्त बताएगा.

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