जिस तरह बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, ठीक उसी तरह मध्यप्रदेश में शिक्षकों का एक ऐसा संगठन है, जो संवेदना और अपनत्व के साथ टूटे हुए परिवारों में उम्मीद की रोशनी भर रहा है।
आज मंगलभवन में हम आपको ऐसे ही एक संगठन से परिचित करा रहे हैं, जिसने सामाजिक संवेदना की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश के कुछ शिक्षकों ने मिलकर टीकमगढ़ में ‘प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ’ नाम का एक गैर-लाभकारी और सेवा-आधारित संगठन बनाया।
63 हजार से अधिक शिक्षकों ने मिलकर दिवंगत साथी के लिए जोड़े 40 लाख रुपए
शुरुआत में संगठन का उद्देश्य केवल शिक्षकों की कुछ मांगों को पूरा करवाना था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें शिक्षक के साथ-साथ शिक्षा विभाग के लिपिक और चपरासी भी जुड़ते चले गए। आज संगठन में सदस्यों की संख्या 63 हजार से अधिक हो चुकी है।
मार्च 2024 में संगठन ने कर्मचारी कल्याण कोष की शुरुआत की। इसमें यह संकल्प लिया गया कि किसी भी शिक्षक अथवा कर्मचारी के आकस्मिक निधन या कठिन परिस्थितियों में उसके परिवार को आर्थिक और सामाजिक रूप से अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। सभी सदस्य सामूहिक सहयोग के माध्यम से एक-दूसरे का संबल बनेंगे।
दिवंगत शिक्षक स्व. दिलीप सिंह के परिजनों को 40 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने के उपलक्ष्य में आभार एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी किया गया।
शिक्षकों एवं कर्मचारियों के कल्याण, सम्मान, एकजुटता और पारस्परिक सहयोग के उद्देश्य के साथ यह संगठन निरंतर सक्रिय है। आज इसी सोच का सशक्त उदाहरण बनकर हजारों शिक्षक अपनी स्वेच्छा से छोटी-छोटी राशि देकर बड़े संकट में फंसे परिवारों का सहारा बन रहे हैं।
स्वैच्छिक सहयोग से बड़ा संबल
संगठन के प्रांतीय संयोजक पवन खरे ने बताया कि संगठन के इस कोष से किसी भी दिवंगत शिक्षक या कर्मचारी के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। सहयोग राशि पूरी तरह स्वैच्छिक है, जिसमें प्रति सदस्य अधिकतम 100 रुपए निर्धारित किए गए हैं। यही छोटी-छोटी रकम मिलकर जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन जाती है।
पीड़ित परिवार के घर जाकर दी जाती है सहायता
श्री खरे ने बताया कि जब संगठन को यह जानकारी मिलती है कि उससे जुड़ा कोई शिक्षक अथवा कर्मचारी दिवंगत हो गया है, तो संगठन के पदाधिकारी उनके घर पहुंचते हैं। दिवंगत व्यक्ति के नॉमिनी का खाता नंबर और बैंक विवरण लिया जाता है। इसके बाद संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप में आर्थिक सहयोग की अपील की जाती है।
एक निश्चित समय के बाद जितनी राशि एकत्रित होती है, उसे सीधे नॉमिनी के खाते में भेज दिया जाता है। उन्होंने बताया कि 10 नवंबर 2025 को दमोह जिले के शिक्षक स्व. दिलीप सिंह लोधी के निधन के बाद संगठन ने उनके परिवार को 40 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। सहायता देने के बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी किया गया।
निरंतर जारी है सहयोग अभियान
श्री खरे ने बताया कि दतिया जिले के शिक्षक राकेश अहिरवार और दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक के शिक्षक किशन लड़िया के असामयिक निधन की जानकारी भी संगठन को मिली है। इन दोनों मामलों में जनवरी माह के दौरान सहयोग राशि एकत्रित की जा रही है, ताकि पीड़ित परिवारों तक समय रहते सहायता पहुंचाई जा सके।
संगठन से जुड़ना है आसान
उन्होंने बताया कि संगठन से जुड़ने के लिए पंजीयन पूरी तरह निःशुल्क है। संगठन की आधिकारिक वेबसाइट https://pmums.com/ के माध्यम से पंजीयन किया जा सकता है। वर्तमान में संगठन से 63 हजार से अधिक शिक्षक एवं कर्मचारी जुड़े हुए हैं। संगठन के प्रत्येक जिले में कम से कम 50 पदाधिकारी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
सहायता में छिपा सकारात्मक संदेश
यह पहल बताती है कि जब समाज के भीतर आपसी विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत होती है, तो छोटी-सी बूंद भी किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। शिक्षक संघ की यह मुहिम केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि संकट की घड़ी में शिक्षक समाज एक परिवार की तरह साथ खड़ा रहता है।