मप्र को बड़ी सौगात: 55 जिलों में बनेंगे गर्ल्स हॉस्टल, टियर-2-3 शहरों पर भी खुला खजाना
केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश को बड़ी राहत। 55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल, टियर-2 और 3 शहरों के विकास के लिए भारी निवेश का ऐलान।
भोपाल। मध्यप्रदेश के लिए इस बार का केंद्रीय बजट उम्मीद से कुछ ज्यादा ही राहत लेकर आया है। खासकर बेटियों की पढ़ाई और शहरों के विकास को लेकर जो घोषणाएं हुई हैं, वे सीधे जमीन से जुड़ी लगती हैं। बजट में 55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे दूर-दराज़ के इलाकों की छात्राओं को सबसे ज्यादा फायदा मिलने वाला है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए साफ किया कि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शहरी बुनियादी ढांचे पर सरकार का फोकस आगे भी बना रहेगा।
55 जिलों में गर्ल्स हॉस्टल, छात्राओं को राहत
प्रदेश के जिन जिलों में अभी तक सुरक्षित और सस्ते छात्रावासों की कमी महसूस की जा रही थी, वहां अब हालात बदल सकते हैं। बजट में हर जिले में विज्ञान, गणित और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली छात्राओं के लिए गर्ल्स हॉस्टल की व्यवस्था करने की बात कही गई है। ग्राउंड लेवल पर देखें तो कई छात्राएं आज भी किराए के कमरों या अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, ऐसे में यह कदम उनके लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
महिला शिक्षा पर सीधा निवेश
यह सिर्फ इमारतें खड़ी करने की योजना नहीं है, बल्कि महिला शिक्षा को टिकाऊ बनाने की कोशिश है। हॉस्टल बनने से छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों की बेटियां भी बड़े शहरों में पढ़ाई का सपना देख सकेंगी, यह बात बजट भाषण में कई बार उभरकर आई।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर सरकार की नजर
बजट में 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए 1.22 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव का भी जिक्र है। मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर जैसे शहरों के साथ-साथ उज्जैन और बालाघाट जैसे शहरों को भी इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।
पानी, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी
इन शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम, डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम किया जाएगा। यानी शहरों की तस्वीर धीरे-धीरे बदलेगी, सिर्फ कागजों में नहीं, ऐसा दावा किया जा रहा है।
आत्मनिर्भर भारत फंड और रोजगार की उम्मीद
आत्मनिर्भर भारत फंड के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही एमएसएमई सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की योजनाएं भी सामने आई हैं। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे।