भिंड का बलदानी: माथा चूमकर, बलाएं लेकर पत्नी ने दी विदाई, 6 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

Update: 2026-01-25 06:37 GMT

जम्मू-कश्मीर के डोडा में देश की रक्षा करते हुए शहीद हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया का शनिवार को उनके पैतृक गांव चितावली (अटेर) में अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। शहीद को अंतिम विदाई देने के दौरान भावुक कर देने वाले कई दृश्य सामने आए, जिसमें सबसे उल्लेखनीय था उनके 6 वर्षीय बेटे भावेश का नम आंखों से पिता को मुखाग्नि देना।

गाल चूमकर बलाएं लेकर विदाई

अंतिम संस्कार के दौरान शहीद की पत्नी शिवानी ने गहरी मजबूती और साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपने पति के पार्थिव शरीर के पास खड़े लोगों को ढांढस बंधाते हुए कहा, "रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा. शिवानी ने अपने पति के गाल चूमे और बलाएं लेकर उन्हें अंतिम विदाई दी। उनका यह जज्बा देखकर वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों की आंखें भी भर आईं।

उन्होंने अपने पति के गालों को चूमते हुए और उनकी बलाएं लेकर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। यह दृश्‍य देखकर वहां मौजूद कई सैन्य अधिकारी भी भावुक हो गए, और कई की आंखें नम हो गईं।

वीरों का परिवार

शैलेंद्र सिंह का परिवार कई पीढ़ियों से देश सेवा में रहा है। उनके दादाजी भी सेना में थे और 1972 में शहीद हुए थे। शैलेंद्र के तीन भाई भी सेना में हैं, जबकि उनके बड़े भाई देवसिंह रिटायर्ड हैं। पिता हनुमत सिंह अपने बेटों की देश सेवा पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

चार दिन पहले आया था फोन बताया था सपना

शहीद की पत्नी ने मीडिया को बताया कि चार दिन पहले शैलेंद्र ने उन्हें फोन किया था। फोन पर उन्होंने बेटियों के भविष्य और घर की जिम्मेदारियों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा था, "मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है. उस रात शैलेंद्र ने एक सपना देखा था, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी से साझा किया। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह उनकी अंतिम बातचीत होगी।

जनसैलाब और फूलों की वर्षा

अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। फूलों की बारिश के बीच "हवलदार शैलेंद्र सिंह अमर रहें" के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने शहीद को श्रद्धांजलि दी और परिवार को हर संभव सैन्य सहायता का आश्वासन दिया। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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